माणा में डिजिटल टेक्नोलॉजी से लेकर आदि कैलाश रूट तक, मोदी सरकार में बदल रही बॉर्डर के गांवों की तस्वीर
2014 से पहले भले ही देश में बॉर्डर से सटे इलाकों के विकास को नजरअंदाज किया गया हो, लेकिन केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं।
हाल ही में जब पीएम मोदी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ पहुंचे तो उन्होंने जोर देकर इस बात को कहा था कि नया भारत अब बिना किसी डर के बॉर्डर से सटे इलाकों के विकास पर फोकस कर रहा है।

और, पीएम मोदी के इस बयान की झलक, पिछले 10 साल में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में हुए विकास-कार्यों में साफ तौर पर दिखती है। फिर चाहे हो वो देश के आखिरी गांव 'माणा' को भारत के पहले गांव के तौर पर नई पहचान देना हो, कैलाश पर्वत जाने के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख में नया रूट तैयार करना हो या फिर 'पीएम वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत बॉर्डर से सटे गांवों में विकास की एक नई कहानी लिखने की शुरुआत करना हो।
पीएम वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम
सबस पहले बात करते हैं 'पीएम वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' की। इस योजना में पहले चरण के तहत बॉर्डर से सटे, खासकर चीन के बॉर्डर से सटे करीब 51 गांवों को विकसित किया जाएगा। इन गांवों के लिए उत्तराखंड सरकार से 23 अक्टूबर 2023 तक एक्शन प्लान भेजने के लिए कहा गया था, और अब इसपर काफी तेजी से काम चल रहा है।
इन गांवों के विकसित होने से ना केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। 51 गांवों में चार गांव- नीती, माणा, मलारी और गुंजी चीन के बॉर्डर से सटे हैं। सरकार की इस योजना के पीछे संदेश साफ है कि अब भारत पड़ोसी देशों के डर से अपने गांवों का विकास रोकने वाला नहीं है।
बॉर्डर से सटे गांवों के लिए 35 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
मोदी सरकार का लक्ष्य है कि बॉर्डर के पास स्थित गांवों तक हर तरह की आवाजाही आसान हो और इसके लिए लगातार नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में जनवरी 2024 में भारत और चीन बॉर्डर को जोड़ने वाले जोशीमठ-मलारी राजमार्ग सहित देश की अलग-अलग जगहों की 35 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं में 6 सड़कों के अलावा 28 पुल भी शामिल हैं और इनमें से तीन पुल उत्तराखंड में बनेंगे, जिनकी लागत करीब 33 करोड़ रुपए है।
कैलाश पर्वत के लिए नया रूट
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित हिंदू धर्म के लिए बेहद पवित्र स्थल और भगवान शिव का घर माने जाने वाले 'आदि कैलाश' तक जाने के लिए पहले एक बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता था, लेकिन अब ये यात्रा आसान होने जा रही है। उत्तराखंड के लिपुलेख में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) एक नया रूट तैयार कर रहा है, जिससे आदि कैलाश की यात्रा काफी आसान हो जाएगी। ये रूट सितंबर 2024 तक शुरू हो सकता है। बीआरओ काफी तेजी से पिथौरागढ़ के नाभीढांग में केएमवीएन हटस से भारत-चीन बॉर्डर पर लिपुलेख दर्रे तक सड़क की कटाई का काम कर रहा है।
आखिरी नहीं, देश का पहला गांव है माणा
उत्तराखंड के चमौली जिले में भारत-तिब्बत सीमा पर बसे माणा गांव की पहचान अब से पहले देश के आखिरी गांव के रूप में थी। लेकिन, मोदी सरकार ने इसे देश के पहले गांव के तौर पर मान्यता दी। कई धार्मिक मान्यताओं को समेटे माणा गांव को देश का पहला गांव बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया कि बॉर्डर पर बना हर गांव भारत का पहला गांव है।
पीएम मोदी ने कहा कि बॉर्डर पर बसे गांवों को अभी तक की सरकारों में देश की सीमा का अंत मान लिया जाता था और ये गांव विकास से दूर हो जाते थे। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर बसे यही गांव देश की समृद्धि की शुरुआत हैं और इसीलिए इन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना जरूरी है। पीएम मोदी के इस विजन के तहत माणा गांव में अब डिजिटल टेक्नोलॉजी अपनाई जा रही है।












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