देवगौड़ा ने कर्नाटक को लेकर ऐसा क्या कह दिया? जिससे केरल में हिला बीजेपी-विरोधी गठबंधन
जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के एक बयान की वजह से केरल की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक दिन पहले उनकी ओर से दावा किया गया था कि कर्नाटक में जेडीएस के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने बीजेपी के साथ लोकसभा चुनावों के लिए जो गठबंधन किया है, उसके लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सहमति है।
जेडीएस नेता की ओर से इस तरह के कथित दावे के बाद यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट) की अगुवा कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इससे केरल में सत्ताधारी सीपीएम और बीजेपी के बीच गुप्त तालमेल की बात साबित हो गई है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को कहा है कि यह इस बात का सबूत है कि जेडीएस के नेता के कृष्णनकुट्टी सीपीएम सरकार में अभी तक मंत्री कैसे बने हुए हैं।

केरल में जेडीएस ने देवगौड़ा के बयान से किया किनारा
वहीं केरल के जेडीएस नेता कृष्णनकुट्टी ने शुक्रवार को अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान का पूरजोर खंडन किया था। उन्होंने बीजेपी के साथ जेडीएस के गठबंधन के राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि केरल में उसका सीपीएम की अगुवाई वाले सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट (LDF) के साथ गठबंधन जारी रहेगा।
पिनराई सरकार में मंत्री कृष्णनकुट्टी ने कहा, 'मैं अपने प्रदेश अध्यक्ष, विधायक मैथ्यू टी थॉमस के साथ उनसे (देवेगौड़ा) मिला और उन्हें बीजेपी के साथ जाने पर अपनी आपत्ति के बारे में बताया। पार्टी की प्रदेश इकाई केरल में लेफ्ट पार्टी के साथ रहने के अपने पहले के फैसले के साथ खड़ी है।'
देवगौड़ा के बारे में पहले क्या खबरें थीं?
रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को देवगौड़ा ने कहा था कि जेडीएस की तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र समेत सभी प्रदेश इकाइयों ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने को लेकर अपनी सहमति दी थी। उन्होंने कहा था, 'केरल में हम सरकार का हिस्सा हैं और हमारे एमएलए वहां मंत्री हैं। ये इकाइयां उन हालातों को समझती हैं, जिसके चलते हमें बीजेपी के साथ जाना पड़ा है और हमारे कदम का समर्थन किया है। केरल में लेफ्ट पार्टी की सरकार में हमारे मंत्री (कृष्णनकुट्टी) ने हमें इसकी सहमति दी है। '
यही नहीं जेडीएस चीफ की ओर से यह भी कहा गया कि 'केरल की लेफ्ट सरकार के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कर्नाटक में पार्टी को बचाने के लिए बीजेपी के साथ जाने के लिए सहमति दी है। स्थिति यही है।'
पिनराई विजयन ने देवगौड़ा के दावों के नकारा
लेकिन, शुक्रवार को केरल के सीएम और सीपीएम नेता पिनराई विजयन ने देवगौड़ा के बयान को 'गलत और पूरी तरह से बेतुका' बता दिया है। उन्होंने कहा कि 'वे अपनी राजनीतिक उथल-पुथल को सही ठहराने के लिए झूठ बोल रहे हैं।'
देवगौड़ा ने सीपीएम के समर्थन होने का किया खंडन
अब देवगौड़ा की ओर से एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करके इस बात का खंडन किया गया है कि उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन में सीपीएम की हामी होने की बात कही थी। उन्होंने कहा है, 'मैंने कभी नहीं कहा कि केरल की सीपीएम बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के समर्थन में है। मैंने केवल इतना कहा कि केरल में मेरी पार्टी की इकाई एलडीएफ सरकार के साथ मिली है, क्योंकि भाजपा के साथ हमारे गठबंधन के बाद कर्नाटक के बाहर मेरी पार्टी इकाइयों के भीतर चीजें अनसुलझी हुई हैं।'
कर्नाटक में भी जेडीएस में हो चुका है विरोध
कर्नाटक में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के हाथों करारी हार के बाद जनता दल (सेक्युलर) ने लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। वह अब भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए में शामिल है। इसको लेकर पार्टी की कर्नाटक इकाई में भी विरोध का सुर फुटने के बाद देवगौड़ा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीएम इब्राहिम जैसे नेता को पार्टी से चलता करके उसकी कमान अपने बेटे और पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के हाथों में दे दी है।
असल में केरल की राजनीति की धारा बिलकुल ही अलग बह रही है। यहां देश में अकेली लेफ्ट पार्टियों के गठबंधन वाली सरकार है, जिसकी अगुवाई सीपीएम कर रही है। इस सरकार में देवगौड़ा की जेडीएस भी शामिल है। जबकि, कांग्रेस की अगुवाई वाला यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (यूडीएफ) वहां विपक्षी दलों का गठबंधन है, जिसमें मुस्लिम लीग भी शामिल है।
इनमें से जेडीएस को छोड़कर केरल की सभी सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ बने 28 विरोधी दलों के गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस) की पार्टनर हैं। (इनपुट-पीटीआई)












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