Dengue fever: डेंगू के इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज ना करें, बिगड़ सकता है मामला
डेंगू बुखार के लक्षण और बचाव: मानसून के लंबा खिंचने के चलते इस साल डेंगू के मामले भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। खासकर डेंगू के कुछ खतरनाक वेरिएंट की वजह से चिंता बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता डेंगू के डीईएनवी-2 वेरिएंट की वजह से है, जिसमें गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। गौरतलब है कि डेंगू हेमरैजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम इस वायरल बुखार से जुड़ी कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जो काफी जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। डेंगू बुखार संक्रमित मच्छर एडीज एजिप्टी के काटने से होता है, जिसके वेरिएंट हैं- डीईएनवी-1, डीईएनवी-2,डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4. इस रोग से बचाव का एक ही उपाय है कि मच्छर ना काटें, इसके तमाम उपाय करके रखें।

डेंगू का संक्रमण कई बार हो सकता है
नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अवी कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा है कि अगर कोई पहले डेंगू बुखार से संक्रिमित हो चुका है तो भी आप इससे संक्रमित हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इस बुखार के लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने से 4 से 7 दिनों बाद देखने को मिलता है। इसकी कोई वैक्सीन नहीं बनी है, इसलिए बचाव ही सुरक्षा है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत ही हल्के हो सकते हैं। लेकिन, कुछ मामले बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते है।

डेंगू के लक्षण
डेंगू के कुछ मरीजों में किसी भी तरह का कोई लक्षण नहीं दिख सकता है। या कभी-कभी इसका लक्षण ऐसा हो सकता है, जो फ्लू की तरह मालूम पड़े। डेंगू के मरीजों का बुखार अचानक 104 से 106 डिग्री फारेनहाइट तक भी जा सकता है। ज्यादातर लोग हफ्ते भर में ठीक हो जाते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में लक्षण बिगड़ सकते हैं और जीवन के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। इसे गंभीर डेंगू, डेंगू हेमरैजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है। कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है, जिससे कुछ मामलों में मृत्यु तक हो सकती है।

जोड़ों और मांसपेशियों में बहुत ज्यादा दर्द
डेंगू के इस मामले में मरीजों को अत्यधिक पीड़ा झेलनी पड़ती है और वे बहुत ही ज्यादा थकावट महसूस कर सकते है। यह कुछ मरीजों को इतना कमजोर कर देता है कि चलने और खड़े होने में भी दिक्कत होने लगती है। छोटा से छोटा काम भी बहुत भारी लगता है। डेंगू की थकावट सामान्य कमजोरी से अलग होती है। जोड़ों का दर्द तक बहुत ही कष्टदायक हो जाता है।

लाल चकत्ते
बुखार आने के 2 से 5 दिनों बाद त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई पड़ सकते हैं और यह डेंगू बुखार का एक विशेष लक्षण है। तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। खासकर तेज बुखार के साथ चकत्ते हों तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें। यह ऐसा लक्षण है, जिससे डॉक्टरों को डेंगू होने का संदेह फौरन पुख्ता हो सकता है। इसलिए, समय ना गंवाएं और डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

मिचली आना और आंखों के पीछे दर्द
डेंगू के कुछ मरीजों को बार-बार मिचली महसूस हो सकती है। उन्हें कुछ खाने में डर लग सकता है कि कहीं उल्टी ना हो जाए। बहुत ज्यादा उल्टी होने की शिकायत भी हो सकती है। डेंगू के मरीजों को बहुत ज्यादा सिरदर्द या आंखों के पीछे दर्द की शिकायत आम है, जिससे उन्हें बहुत ही ज्यादा परेशानी होती है। डेंगू के ज्यादातर मामलों में यह दिक्कत हो सकती है।

डेंगू बुखार में खतरे के संकेत को समझें
जैसा कि पहले ही बताया गया है कि डेंगू के कुछ लक्षण बहुत ही गंभीर होते हैं, इसलिए उन लक्षणों को कतई नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर अवी कुमार ने इसके बारे में बताया है कि अगर डेंगू मरीजों में आगे बताए जाने वाले लक्षण दिखते हैं तो तत्काल डॉक्टर के पास पहुंचें-
नाक या मुंह से खून निकलना: डेंगू मरीजों में प्लेटलेट काउंट में भारी गिरावट की वजह से मुंह या नाक से खून आना शुरू हो सकता है। आंतरिक रक्तस्राव भी हो सकता है।
तेज बुखार: डेंगू मरीज यदि तुरंत बिस्तर पकड़ ले और उसे बहुत तेज बुखार हो जो कि 106 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाए।
पेट में बहुत ज्यादा दर्द: डेंगू में मांसपेशियों में दर्द की शिकायत तो आम है, लेकिन इसके साथ ही यदि पेट में भी दर्द होने लगे तो मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए फौरन डॉक्टरी सलाह जरूरी है, जिससे तत्काल उसकी स्थिति के हिसाब से दवा शुरू की जा सके।

प्लेटलेट्स गिरना
अगर डेंगू के मरीज में प्लेटलेट्स काउंट में बहुत ज्यादा गिरावट आती है तो इसे चेतावनी समझें और किसी भी सूरत में इस लक्षण को नजरअंदाज ना करें। एक सामान्य इंसान के खून में प्लेटलेट्स काउंट 1.5 लाख से लेकर 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होता है। लेकिन, डेंगू मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने की आशंका रहती है। डेंगू के मरीजों में यह 20,000 या उससे भी नीचे गिरने का खतरा रहता है। इसलिए इसपर निगरानी रखने की जरूरत रहती है। लेकिन, जैसे ही मरीज डेंगू से रिकवर होने लगता है तो यह पूरी तरह से बहुत ही तेजी से सामान्य भी होने लगता है। लेकिन, गंभीर मरीजों में प्लेटलेट्स चढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।












Click it and Unblock the Notifications