डेंगू -चिकनगुनिया की गिरफ्त में जल्दी आ सकते हैं दिल्ली वाले, इसलिए हो जाएं सावधान
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नई दिल्ली। भारी वर्षा के कारण बदहवास सी दिल्ली के निवासियों के लिए एक और बुरी खबर है, उन्हें अब मच्छरों से भी बचकर रहना होगा क्योंकि अब यहां मच्छर जनित रोग डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। गौरतलब है कि इस बार जनवरी के महीने में दिल्ली में तीन मरीज डेंगू से ग्रसित पाए गए थे, हालांकि ये आंकड़ा आगे नहीं बढ़ा लेकिन कड़कड़ाती ठंड में डेंगू से ग्रसित होना थोड़ा अचरज भरा जरूर था और अब तक मौसम ही पानी का है और इस वजह से लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

एडिस मूल का मच्छर
वक्त से पहले डेंगू होने के पीछे वैज्ञानिकों ने कहा है कि एशियाई और यूरोपीय मूल के लोगों में गंभीर डेंगू होने के खतरे ज्यादा होते हैं लेकिन इस बीमारी के कारण बनने वाले एडिस मूल के मच्छरों के उत्तर अमेरिका और यूरोप में पैदा होने के कारण इस रोग के लिए जिम्मेदार विषाणु हाल में इन क्षेत्रों में भी फैल गया है और इस वजह से यहां ये रोग अपने सीजन से पहले भी दस्तक दे सकता है।

लोगों का सावधान रहने की जरूरत है..
इसलिए लोगों का सावधान रहने की जरूरत है ना कि परेशान होने की। आपको बता दें कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) के मुताबिक दिल्ली में पिछले वर्ष डेंगू से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी।

डेंगू के लक्ष्ण
- डेंगू एक बीमारी हैं जो एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता हैं।
- इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल-लाल चकत्ते दिखायी पड़ते हैं।
- इसमें बुखार बहुत तेज आता है और सिर में बड़ी तेजी से दर्द होता है।
- बॉ़डी पेन के साथ शरीर के जोड़ों में भी दर्द होता है।
- लोगों का खाना पचाने में दिक्कत होने लगती है।
- उन्हें उल्टी होने लगती है, उन्हें भूख नहीं लगती है।
- मरीज को भूख नहीं लगती है।
- उसका ब्लडप्रेशर कम हो जाता है।
- उसे चक्कर आने लगते हैं, कमजोरी महसूस होने लगती है।
- बॉडी में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं।
- लीवर और सीने में फ्लूइड का जमा हो जाता है।
- अगर यह सब लक्षण मनुष्य को दिखे तो उसे तत्काल प्रभाव से ब्लड की जांच करानी चाहिए।
- डेंगू का टेस्ट हर सरकारी अस्पताल में उपलब्द्ध है।
- चिकनगुनिया के बुखार में इंसान के जोड़ों में काफी दर्द होता है।
- कभी-कभी तो ये दर्द ठीक होने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है।
- मरीज को हमेशा बुखार रहता है (100 डिग्री के आस-पास)।
- एक निर्धारित समय आने पर बुखार एकदम से तेज भी हो जाता है।
- शरीर पर लाल रंग के रैशेज बन जाते हैं।
- मरीज को भूख नहीं लगती और हमेशा थकान महसूस होती है।
- सिर में दर्द और खांसी-जुकाम रहता है।













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