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Tripura: अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग पर प्रदर्शन, केंद्र सरकार ने जताया गहरा खेद

Tripura: त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग पर हुए उल्लंघन को लेकर भारत सरकार ने गहरी चिंता और खेद व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में राजनयिक और कांसुलेट संपत्तियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

यह बयान तब आया जब बांग्लादेश में हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 से अधिक प्रदर्शनकारी बांग्लादेशी मिशन के परिसर में घुस गए। जिससे वहां मौजूद राजनयिकों और कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया।

agartala

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

MEA ने बयान जारी कर कहा कि भारत सरकार देश में मौजूद बांग्लादेशी मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है। नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग और अन्य उप और सहायक उच्चायोगों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि कांसुलेट संपत्तियों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारत ने बांग्लादेश सरकार से अपने देश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय, की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने दास के खिलाफ राजद्रोह के मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आग्रह किया है।

भारत की चिंता, अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

नई दिल्ली ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और चरमपंथी बयानबाजी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का अनुरोध किया है।

प्रधान मंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस द्वारा बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभालने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत लंबे समय से बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमलों को लेकर चिंतित है।

प्रदर्शन का कारण और राजनयिक असर

अगरतला में विरोध प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

हालांकि प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी सहायक उच्चायोग के परिसर में घुसपैठ ने राजनयिक संबंधों को प्रभावित किया है। भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

भारत सरकार की प्रतिबद्धता

MEA ने राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। भारत ने बांग्लादेशी उच्चायोग और अन्य मिशनों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। भारत सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि वह दोनों देशों के बीच स्थिर और सहयोगी द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

अगरतला में हुई घटना ने भारत-बांग्लादेश के बीच राजनयिक तनाव को उजागर किया है। भारत ने जहां बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर दिया। वहीं राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया। यह घटनाक्रम दोनों देशों के लिए एक चुनौती है। जो क्षेत्रीय स्थिरता और परस्पर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बन सकता है।

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