कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध हटाने की उठी मांग, जानें क्या बोले सिद्धारमैया कैबिनेट के मंत्री डॉ जी परमेश्वर
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की सरकार आते ही हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग उठने लगी है। इस मांग पर राज्य मंत्री जी परमेश्वर ने जवाब क्या दिया है?

कर्नाटक में पिछली सरकार ने लगभग एक साल बाद कॉलेज के अंदर लड़कियों के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिस पर जमकर लंबे समय तक विवाद भी चला था और भाजपा सरकार की मुस्लिम समुदाय ने जमकर खिलाफत की थी और जिसका परिणाम चुनाव प्रचार में दिखा। वहीं विधानसभा चुनाव में 13 फीसदी मुसलमानों का वोट हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी के कर्नाटक में सत्ता संभालते ही हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हाटाने की मांग उठने लगी है। जिस पर राज्य के मंत्री जी परमेश्वर ने बुधवार को जवाब दिया है।
सिद्धारमैया सरकार हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाएगी?
क्या कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाएगी? नेएमनेस्टी इंडिया की कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध हटाने की मांग का जवाब देते हुए राज्य के मंत्री डॉ जी परमेश्वर कहा कि सरकार भविष्य में इस मुद्दे को हमारी सरकार देखेगी।
परमेश्वर ने बताया कि क्या है सिद्धारमैया सरकार की प्राथमिकता
जी परमेश्वर ने कहा कि कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता पांच चुनावी वादों को पूरा करने की है। परमेश्वर के कहा हम भविष्य में देखेंगे कि हम क्या कर सकते हैं। अभी हमें कर्नाटक के लोगों से की गई पांच गारंटियों को पूरा करना है।
एमनेस्टी इंडिया ने की है ये मांग
बता दें मंलगवार को एमनेस्टी इंडिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी थी, जिसमें संगठन ने सिद्धारमैया सरकार से राज्य में सभी के लिए मानवाधिकार को प्राथमिकता देने और बनाए रखने का आग्रह किया। इस पोस्ट में ये भी लिखा गया था
'शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को तुरंत रद्द करें। यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्म के अधिकार और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है, जिससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।'
उडुपी में पिछले साल शुरू हुआ था ये मामला
बता दें 2022 में कर्नाटक के उडुपी शहर के एक सरकारी कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर परीक्षा देने से मना करने पर जमकर विवाद हुआ था। इस घटना के बाद मुस्लिम संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने तेज विरोध करना शुरू कर दिया था। जिन्होंने कॉलेज पर लड़की के धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। बाद में ये मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया जहां इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है।












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