Delimitation: परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ खुलकर खड़ी हुई कांग्रेस, खड़गे ने कहा 'अन्याय'
Delimitation exercise: परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को कर्नाटक के गदग में एक कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाती है, तो यह दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ 'अन्याय' होगा।
उनके मुताबिक ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की लोकसभा में प्रतिनिधित्व क्षमता घट जाएगी। खड़गे ने जनता से इस कथित 'अन्याय' के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की।

Delimitation exercise: दक्षिण भारत के राज्यों पर असर
परिसीमन की प्रक्रिया के तहत संसद और विधानसभाओं में सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है, जिसका प्रभाव सीधे राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ता है। कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा है कि उत्तर भारतीय राज्यों की लोकसभा सीटों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों में कमी की जा सकती है। यह स्थिति दक्षिण के राज्यों के विकास और उनके अधिकारों को कमजोर कर सकती है।
Delimitation News: सहकारी संघवाद पर सवाल
खड़गे ने सहकारी संघवाद की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकारों में कटौती कर रही है और उन्हें मिलने वाले फंड को भी कम किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से कर्नाटक को मिलने वाली राशि में 58 प्रतिशत की कमी आई है।
Delimitation Politics: शिक्षा क्षेत्र में गिरावट
खड़गे ने शिक्षा क्षेत्र की कथित अनदेखी को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब आईआईटी, आईआईएम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी होगी, तो हमारे बच्चे किस तरह प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ेंगे?
Delimitation: कांग्रेस का रुख
कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ किया कि उनकी पार्टी दक्षिण भारतीय राज्यों के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस कथित 'अन्याय' के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें।
बता दें कि परिसीमन के मुद्दे को लेकर इस समय तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके सबसे ज्यादा आक्रामक है। तमिलनाडु में कांग्रेस भी उसकी सहयोगी है। यही वजह है कि कांग्रेस शासित कर्नाटक और तेलंगाना सरकार भी परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके की राजनीति को हवा देने में लगे हुए हैं और कांग्रेस अध्यक्ष का बयान भी उसी राजनीति का संकेत दे रहा है। (इनपुट-पीटीआई)












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