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आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की क्रूरतम हत्या के पीछे है बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ?

बेंगलुरू। 23 फरवरी की रात को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर भीड़ के इकट्ठा होने के बाद भड़की हिंसा में अब तक कुल 42 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 350 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जिनका इलाज दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में किया जा रहा है। मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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गत 23 से 26 फरवरी के बीच दिल्ली के करीब 15 इलाकों में दंगे भड़के, जिसमें कई लोग जिंदा जला दिए गए, तो कई लोगों को चाकू-तलवार जैसे धारदार हथियारों से हमला किया गया। हालांकि हिंसा में मारे गए अधिकतर लोगों की मौत गोली लगने की वजह से हुई है जबकि कुछ की मौत दंगाइयों के हमले से हुई है। अभी तक मृतकों में शामिल 42 लोगों में से 30 की ही पहचान हो गई है।

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गौरतलब है हिंसा प्रभावित चांद बाग इलाके के एक नाले में मिले चार लाशों में शामिल एक आईबी अफसर की क्षतिग्रस्त लाश दंगाईयों के मकसद पर सवाल उठा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए खुलासे से पता चला है कि चांद बाग के नाले में मिली आईबी अफसर की लाश में 400 से अधिक चाकू के निशान पाए गए हैं।

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आईबी सरकार के साथ बेहद ही क्रूरतम तरीके से पेश आए दंगाइयों ने उनकी पेट की आंतड़ियां तक बाहर निकाल ली थी। यही वजह है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों पर अंकित की हत्या में शामिल होने की आंशका जताई है।

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सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर इसलिए तो नहीं की गई, क्योंकि आईबी अफसर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ आरोपी ताहिर हुसैन के तार की जांच कर रहे थे।

स्वामी ने कहा कि अगर यह सच है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। सुब्रमण्यम स्वामी के बांग्लादेशी घुसपैठिए पर अंकित शर्मा के हत्यारे बताए जाने के बाद इंटलीजेंस ब्यूरो फिलहाल जांच में जुट गई है। आशंका इसलिए भी बलवती हुई है, क्योंकि जिस बेहरहमी से आईबी अफसर की हत्या को अंजाम दिया गया है वह दंगों के लिहाज से सामान्य नहीं है।

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बांग्लादेशी घुसपैठियों पर आईबी अफसर की हत्या में सुब्रमण्यम स्वामी की आंशका पर मुहर लग गई जब गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बांग्लादेशी छात्रा को सरकार विरोधी गतिविधियों में बार-बार शामिल होने के लिए देश छोड़कर जाने का फरमान सुना दिया।

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मामला पश्चिम बंगाल के विश्व भारती विश्वविद्यालय से जुड़ा है और उक्त बांग्लादेशी छात्रा वहां से ग्रेजुएट की स्टूडेंट है। छात्रा का नाम अफसरा अनिका मीम बताया जा रहा है। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय, कोलकाता ने बांग्लादेशी छात्रा अफसरा मीम को भारत छोड़ो नोटिस दे दिया है, जिसमें में कहा गया है कि मीम ने वीजा उल्लंघन भी किया।

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बांग्लादेशी छात्रा अफसरा मीम को भारत छोड़ो नोटिस में कहा गया है कि 'वह सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल पाई गई और ऐसी गतिविधि वीजा नियमों का सरासर उल्लंघन करती हैं। विदेशी नागरिक भारत में नहीं रह सकती, उन्हें इस आदेश की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर भारत छोड़ना होगा। नोटिस में यह नहीं बताया गया कि वह किस तरह की गतिविधियों में शामिल रही है।

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हालांकि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक सदस्य के मुताबिक अफसरा मीम ने दिसंबर में परिसर के भीतर सीएए विरोधी प्रदर्शनों के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर कुछ पोस्ट किए थे और तब से उसे सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा था। अब वह पोस्ट कैसे थे, इसका खुलासा नहीं हो सका है।

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उल्लेखनीय है भारतीय संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर हिंदुस्तान में आकर शरणार्थियों की जीवन जी रहे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसियों के लिए हैं।

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बावजूद इसके सीएए के खिलाफ मुस्लिम अल्पसंख्यक सड़कों पर उतरे हैं और पूरे देश को सिर पर उठा रखा है। जबकि सीएए कानून में किसी भी भारतीय चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक किसी भी नागरिक की सिटीजनशिप पर कोई खतरा नहीं है। यह बात मीडिया और सरकार द्वारा कई बार दोहराई जा चुकी है।

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सीएए के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले दो महीने से चल रहा धरना, जिससे दिल्ली का एक हिस्सा पूरी तरह से पैरालाइज हो चुका था। उसके बाद धरना जाफराबाद में शुरू किया गया और जाफराबाद में दिया जाने वाले धऱने का एकाएक हिंसक हो जाना धरने और विरोध की औचित्व पर सवाल खड़े करता है।

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दिल्ली हिंसा में अब तक कुल 42 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और तकरीबन 350 से अधिक लोगों के घायल रूप से घायल हो गए है। अनुमान है कि जाफराबाद समेत कुल 15 इलाको में हुए दंगों में करोड़ों के सार्वजनिक और निजी प्रॉपर्टी का नुकसान अलग हो चुका है।

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दिल्ली में हुए दंगे की जांच के लिए गठित एसआईटी ने राजधानी में कुल ऐसे 15 बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान की है, जिन्होंने कथित तौर पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हिंसा की घटना को अंजाम दिया था। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि 15 से अधिक बांग्लादेशी उपद्रवियों की भीड़ में शामिल थे, जिन्हें सीमापुरी क्षेत्र में शुक्रवार की प्रार्थना के बाद देखा गया। सभी वहां अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।

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सवाल यह है कि सीएए के विरोध में उतरे बहुसंख्यक मुस्लिम प्रदर्शनकारी आखिर नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर क्यों रहे हैं। इसका जवाब नहीं मिलेगा, क्योंकि उन्मादी भीड़ सवाल-जवाबों से दूर भागती है। भीड़ में मौजूद कोई शख्स नागरिकता संशोधन कानून का विरोध नहीं कर रहा है, क्योंकि उसका मकसद जाफराबाद के दंगे में आईबी अफसर अंकित हत्या की बर्बर तरीक से हुई हत्या में छिपा हुआ है।

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बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी इस पर सवाल उठा चुके हैं, क्योंकि जिस सीएए से भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता खतरे में है या नहीं, जिसका उससे लेना-देना नहीं है, तो फिर क्या वो दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों की लड़ाई रह रहे हैं?

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यह सवाल मौजू इसलिए भी हैं क्योंकि अकेले दिल्ली में कितने पाकिस्तानी और बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं, इसका कोई सटीक आंकड़ा पब्लिक डोमेन में नहीं है। वर्ष 2003 में दिल्ली के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अजय राज शर्मा ने दिल्ली के प्रत्येक जिले के डीसीपी कार्यालय में बांग्लादेशी सेल का गठन किया था।

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गौर करने वाली बात यह है कि गठन के एक ही साल के अंदर पूरी दिल्ली में करीब 50 हजार बांग्लादेशी गिरफ्तार किए गए थे। अगर वर्ष 2003 में दिल्ली में 50, 000 बांग्लादेशी घुसपैठिए थे, तो वर्ष 2020 यानी 17 वर्षों में इनकी संख्या 4 गुना वृद्धि तय माना जा सकती है, जो एक बड़ी समस्या है, जो न केवल सामाजिक समस्या है बल्कि राजनीतिक समस्या के द्योतक हैं।

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पश्चिम बंगाल का उदाहरण हमारे सामने है, जहां करीब 100 विधानसभा सीटों पर जीत और हार का निर्णय बांग्लादेशी घुसपैठिए तय करते हैं। यही कारण है कि जब वाम मोर्च की सरकार पश्चिम बंगाल में हुआ करती थी तो वाममोर्चा उनके लिए सेल्टर बनी हुई थी और अब वहां सत्ताधारी पार्टी त्रृण मूल कांग्रेस बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोट बैंक के लिए सेल्टर दे रखा है।

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दिलचस्प बात यह है कि जब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी विपक्ष में थीं, तो उन्होंने जोर-शोर से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा दिल्ली में उठाया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही वहीं बांग्लादेशी घुसपैठियों को सत्ता की कुंजी बनाए रखने के लिए सीएए के खिलाफ मोर्चा लेकर खड़ी हैं।

यह भी पढ़ें-Shaheen Bagh: तो क्या देश में छुपकर बैठे मुस्लिम घुसपैठियों के लिए धरने पर बैठे हैं भारतीय मुस्लिम?

IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर

IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली दंगों को लेकर एक ट्वीट में लिखा है कि 'सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर इसलिए तो नहीं की गई क्योंकि आईबी अफसर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार की जांच कर रहे थे। स्वामी ने कहा, 'अगर ये सच है तो यह बहुत गंभीर मामला है।'

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर हत्या का आरोप

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर हत्या का आरोप

सुब्रमण्यम स्वामी ने आम आदमी पार्टा के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप लगाया है कि वे इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में शामिल थे। अंकित शर्मा का शव बुधवार को चांद बांग में एक नाले से मिला था। अंकित के परिवार के सदस्यों ने सीधे-सीधे ताहिर हुसैन और उनके समर्थकों पर अगवा करके अंकित को जान से मारने का आरोप लगाया है।

26 फरवरी को चांद बाग के एक नाले में मिला था अंकित का शव

26 फरवरी को चांद बाग के एक नाले में मिला था अंकित का शव

मृतक आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी को चांद बाग के एक नाले से मिला। अंकित शर्मा के पिता राजिंदर कुमार का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे ताहिर हुसैन का हाथ है। अंकिता के पिता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि 25 फरवरी को अंकित घर से कुछ सामान खरीदने बाहर गए थे लेकिन वह घर नहीं लौटे। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि अंकित की हत्या करने के बाद उनके शव को चांद बाग के नाले में फेंक दिया गया है।

 ताहिर की मकान की छत पर ईंटों से भरे पंद्रह कट्टे,ज्वनलशील पदार्थ मिले

ताहिर की मकान की छत पर ईंटों से भरे पंद्रह कट्टे,ज्वनलशील पदार्थ मिले

जांच अफसरों के अनुसार आरोपी ताहिर की फैक्ट्री में ग्राउंड फ्लाईलोवर पर पार्टी के होंडी व पोस्टर पड़े हुए थे जबकि फर्स्ट फ्लाईओवर पर दफ्तर और सेकंड व थर्ड फ्लाईओवर पर फैमिली रहती थीं। मकान की छत पर ईंटों से भरे पंद्रह कट्टे,ज्वनलशील पदार्थ के अलावा दफ्तर में जले हुए 10-15 कंप्यूटर पड़े हुए थे। हालांकि फैक्ट्री के एंट्री पॉइंट व दफ्तर में लगे छह सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को कब्जे में ले लिया गया, जबकि उपद्रवियों की लगभग 200 वीडियो क्लिप हाथ लग पाई हैं। शुरूआती जांच में ताहिर की आईबी के जवान अंकित शर्मा की हत्या और दंगों में भूमिका को खंगाला जा रहा है।

अंकित की हत्या के लिए सीधे तौर पर ताहिर जिम्मेदार है-कपिल मिश्रा

अंकित की हत्या के लिए सीधे तौर पर ताहिर जिम्मेदार है-कपिल मिश्रा

अंकित हत्या मामले में ताहिर हुसैन ने खुद को निर्दोष बताया है। गुरुवार को ताहिर ने कहा, 'मैं अंकित को निजी तौर पर नहीं जानता हूं। उसकी मौत का मुझे दुख है। अंकित का परिवार मुझ पर आरोप लगा सकता है लेकिन मैं निर्दोष हूं।' मीडिया रिपोर्टें में स्थानीय लोगों के हवाले से कहा गया है कि बाहर उत्पात मचा रही भीड़ अंकित और कुछ अन्य लड़कों को उठाकर ले गई। जबकि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अंकित की हत्या के लिए सीधे तौर पर ताहिर को जिम्मेदार ठहराया है। कपिल का दावा है कि ताहिर के लोग अन्य लड़कों के साथ अंकित को भी उठाकर ले गए और उसकी हत्या बेरहमी से हत्या कर दी।

 जाफराबाद, मौजपुर व चांद बाग में सबसे ज्यादा हुई हिंसा और आगजनी

जाफराबाद, मौजपुर व चांद बाग में सबसे ज्यादा हुई हिंसा और आगजनी

उत्तर पूर्वी दिल्ली में गत रविवार को सीएए समर्थकों एवं विरोधियों के बीच झड़प ने सोमवार को हिंसा एवं उपद्रव का रूप धारण कर लिया। सोमवार और फिर उसके बाद मंगलवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, कबीर नगर, कर्दमपुर, सीलमपुर, चांद बाग और यमुना विहार में उपद्रवियों ने भीषण तबाही मचाई। इन जगहों पर दंगाइयों ने दुकानों, घरों और वाहनों में आग लगा दी। दिल्ली हिंसा में अब तक कम से कम 43 लोगों की मौत हो चुकी है और घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

 हिंसा में मारे गए 42 में से 30 शवों की हो चुकी है पहचान

हिंसा में मारे गए 42 में से 30 शवों की हो चुकी है पहचान

गुरूवार, 27 फरवरी की रात तक हिंसा में मारे गए 42 में से 30 शवों की जानकारी मिल चुकी थी। 30 में से 9 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है, जबकि पांच को बगैर धारदार हथियार से मारा गया है। एक शव बुरी तरह जला मिला है। तीन को चाकू घोंपकर मारा है और 2 लोगों की मौत का कारण पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगा।

दिल्ली हिंसा में मारे गए मृतकों के पोस्टमार्टम में लगेंगे दो से तीन दिन

दिल्ली हिंसा में मारे गए मृतकों के पोस्टमार्टम में लगेंगे दो से तीन दिन

फोरेंसिक डॉक्टरों के अनुसार शवों की संख्या ज्यादा होने के कारण पोस्टमार्टम में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। दिल्ली पुलिस की ओर से पंचनामा पूरे होने के बाद ही पोस्टमार्टम किए जा सकते हैं। अभी तक नौ शवों के पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपे जा चुके हैं।

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