स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी वार्डों के 97 प्रतिशत क्षेत्रों में घर-घर कचरा संग्रहण का लक्ष्य हासिल किया गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत भर के लगभग 97 प्रतिशत नगरपालिका वार्ड अब घर-घर जाकर कचरा संग्रहण में शामिल हो गए हैं, जो स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाता है। केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रसंस्करण में 2014 में 16 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 81 प्रतिशत होने की उल्लेखनीय वृद्धि की सूचना दी।

यह सुधार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नगर पालिकाओं के भीतर मजबूत बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता को दर्शाता है। मंत्रालय ने लीगेसी वेस्ट उपचार में भी तेजी से प्रगति देखी है, जिसमें 2,482 डंपसाइटों पर लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का लगभग 65 प्रतिशत अब तक साफ किया जा चुका है। इस प्रयास से शहरी भूमि के लगभग 9,000 एकड़ को उत्पादक उपयोग के लिए पुनः प्राप्त किया गया है।
ये उपलब्धियां विज्ञान भवन में दो दिवसीय एसबीएम-यू 2.0 की राष्ट्रीय समीक्षा के दौरान उजागर की गईं, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने की। मंत्री ने वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के हिस्सों को संरेखित करने, निविदा में देरी और भूमि आवंटन जैसे कार्यान्वयन की बाधाओं को हल करने और संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री मनोहर लाल ने कहा, "हमें उस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जिसे हमें बदलना है, चाहे वह वित्तीय चुनौतियां हों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के हिस्सों का मिलान करना हो, निविदा में देरी, भूमि आवंटन जैसी कार्यान्वयन बाधाओं को हल करना हो या संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाना हो।" उन्होंने राज्यों से अगले दस महीनों के भीतर आवंटित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक केंद्रित योजना तैयार करने का आग्रह किया।
राज्य-वार मानचित्रण और निगरानी
मंत्री ने प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों के राज्य-वार मानचित्रण का आह्वान किया। राज्यों को मंत्रालय द्वारा नियमित समीक्षाओं और कठोर ट्रैकिंग की सुविधा के लिए प्रतिदिन स्वच्छतम पोर्टल पर प्रगति को अपडेट करने का निर्देश दिया गया था। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य एसबीएम-यू लक्ष्यों को प्राप्त करने में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
व्यवहार परिवर्तन का महत्व
मंत्री ने स्वच्छता उद्देश्यों को प्राप्त करने में व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने शिक्षा पाठ्यक्रम में 'स्वभाव स्वच्छता' और 'संस्कार स्वच्छता' जैसी अवधारणाओं को एकीकृत करने की वकालत की ताकि कम उम्र से ही स्वच्छता को एक मूल मूल्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
With inputs from PTI












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