Delhi Police Truecaller की मदद से रोकेगी साइबर क्राइम, जामताड़ा मॉडल से क्या हैं कनेक्शन, जानिए

दिल्ली पुलिस साइबर अपराधियों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूंद करने की तैयारी में है। झारखंड के जामताड़ा में होने वाले क्राइम के पैटर्न से सीखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रू कॉलर से एमओयू किया है। जानिए क्या है पूरा मामला

Delhi Police Truecaller

Delhi Police Truecaller के साथ मिलकर साइबर क्रिमिनल पर नकेल कसने की तैयारी में है। दिल्ली पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा जिले में होने वाले साइबर क्राइम के पैटर्न पर पुलिसकर्मियों को ठगने वाले अपराधियों को ट्रैक करेगी। 'जामताड़ा मॉडल' पुलिस विवरण के दुरुपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। इस पर रोक लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने Truecaller के साथ गठजोड़ किया। जानिए स्मार्टफोन पर आधारित ऐप कैसे पुलिस की मदद करेगा

Delhi Police Truecaller

Delhi Police Truecaller एक मंच पर आए

जानकारी के अनुसार, Truecaller ऐप की सरकारी डायरेक्ट्री में दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों के आधिकारिक नंबर दिखाने में मदद करेगा। दिल्ली पुलिस ने जनता को सत्यापित नंबरों की पहचान करने में मदद करेगा। सरकारी अधिकारियों के नाम पर संबंधित साइबर धोखाधड़ी और घोटालों से बचने में मदद करने के लिए ट्रू कॉलर के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

Delhi Police Truecaller

सत्यापित नंबरों की पहचान में मदद मिलेगी

झारखंड के जामताड़ा जिले में होने वाले अपराधों को 'जामताड़ा मॉडल' कहा जा रहा है। इस साइबर स्कैम के तहत नागरिकों से पैसे निकालने के लिए अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताते हैं। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक संपर्क नंबरों को सत्यापित करने के लिए कॉलर आईडी सत्यापन प्लेटफॉर्म Truecaller का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इससे नागरिकों को सत्यापित नंबरों की पहचान करने और सरकारी अधिकारियों के नाम पर होने वाले घोटालों से खुद को बचाने में मदद मिलेगी।

कोरोना काल में Truecaller का इस्तेमाल

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार MoU के प्रयास लंबे समय से हो रहे थे। दिल्ली पुलिस ने विगत फरवरी में कहा था, कोविड-19 महामारी के दौरान, ट्रू कॉलर ने हमारी बहुत मदद की थी क्योंकि ऑक्सीजन सिलेंडर, कंसन्ट्रेटर्स, दवाएं और घातक वायरस के इलाज से जुड़े अन्य जरूरी सामान बेचने के बहाने बहुत सारे घोटाले और धोखाधड़ी की सूचना मिली थी। इसलिए, हमारे अधिकारियों ने उन जालसाजों की संख्या की पहचान की और Truecaller को सतर्क किया। इसके बाद धोखाधड़ी करने वाले साइबर अपराधियों के असत्यापित नंबरों को स्पैम दिखाया जाने लगा।

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    आधिकारिक फोन नंबरों को सत्यापित करेंगे

    दिल्ली पुलिस और ट्रू कॉलर के परस्पर सहयोग के बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पुलिस उपायुक्त (जनसंपर्क अधिकारी) सुमन नलवा ने फरवरी में बताया था कि धोखेबाजों ने कई बार खुद को सरकारी अधिकारी बताया, इस बात पर ध्यान देते हुए नलवा ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सभी आधिकारिक फोन नंबरों को सत्यापित किया जाएगा। "दिल्ली पुलिस के सभी सत्यापित नंबरों पर एक हरा बैज और एक नीला टिक मार्क दिया जाएगा। इसमें एक सरकारी सेवा टैग भी होगा। इससे यूजर्स को सत्यापित नंबरों को पहचानने में मदद मिलेगी।

    ट्रूकॉलर और नवीनतम साइबर अपराध

    नलवा ने कहा, एमओयू के अनुसार, सरकारी डायरेक्टरी सर्विस में नंबरों को शामिल करने के लिए पुलिस डिपार्टमेंट को आधिकारिक संपर्क नंबर शेयर करने होंगे। हमें ट्रूकॉलर को नवीनतम साइबर अपराध के खतरों और रुझानों के बारे में सतर्क करने और नियमित रूप से स्पैम या घोटाले होने पर नंबर शेयर करने की जरूरत होगी।"

    फ्रॉड और जबरन वसूली के मामले बढ़े

    खास बात ये कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब घोटालेबाजों ने सरकारी अधिकारियों के रूप में जबरन वसूली की। इसके अधिक से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। एक ट्विटर यूजर गीतिका रुस्तगी ने हाल ही में ऐप पर एक थ्रेड साझा किया कि कैसे लोगों के एक समूह ने FedEx कस्टमर केयर ऑपरेटर के साथ-साथ मुंबई पुलिस अधिकारियों के बहाने एक WhatsApp कॉल पर फ्रॉड का प्रयास किया।

    खुद को पुलिस बताकर गृहिणी को ठगा

    इस महीने की शुरुआत में, पश्चिम बंगाल के बिधाननगर में एक गृहिणी को कथित रूप से जालसाजों ने ठगा। घोटाले के लिए ट्रूकॉलर ऐप में अपना फोन नंबर "बिधाननगर साइबर अपराध पुलिस" के रूप में सेव किया गया था। उसकी गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे निकाल लिए गए। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, गृहिणी को धोखा देने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    फर्जीवाड़े की हद! खुद को बताया उपराष्ट्रपति!

    इससे पहले फरवरी में, इटली में रहने वाले एक 22 वर्षीय भारतीय को लोगों को ठगने और वरिष्ठ नौकरशाहों से लाभ लेने के लिए जगदीप धनखड़ की तस्वीर का दुरुपयोग करने, फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर खुद को कथित रूप से भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में प्रस्तुत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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