कहीं आपके पास तो नहीं आई 'जामताड़ा' से कॉल? 14 आरोपी गिरफ्तार, 36 लोगों से ठगे 1 करोड़ रुपए
बता दें कि जामताड़ा, पूर्वी झारखंड में स्थित एक जिला है, जो अब फिशिंग उद्योग के केंद्र के तौर पर उभर रहा है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त। 'हैल्लो, क्या आप जामताड़ा से बोल रहे हैं?' अगर आपके पास भी कभी कार्ड ब्लॉक, बैंक अकाउंट ब्लॉक, एटीएम हेडक्वार्टर या एसबीआई की मेन ब्रांच से फोन कॉल आए तो उस शख्स से ये सवाल जरूर पूछिएगा। हालांकि इसका जवाब शायद वो शख्स आपको ना दे लेकिन इसकी बहुत अधिक संभावना है कि ये फोन कॉल आपको जामताड़ा से ही आया होगा। अगर आप भी ये शब्द पहली बार सुन रहे हैं तो बता दें कि जामताड़ा, पूर्वी झारखंड में स्थित एक जिला है, जो अब फिशिंग उद्योग के केंद्र के तौर पर उभर रहा है।

जामताड़ा पर बन चुकी है वेबसीरीज
बहुचर्चित जामताड़ा जिले पर एक वेब सीरीज 'जामताड़ा-सबका नंबर आएगा' भी बनी है जिसे आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस को फर्जी फोन कॉल कर लोगों को ढगने वाले जामताड़ा गिरोह का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने छापेमारी के बाद झारखंड के जामताड़ा से 14 साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस साइबर सेल के डीसीपी अन्येश रॉय ने इस सफलता की जानकारी दी।
पुलिस ने लॉन्च किया 'साइबर प्रहार' भाग 2
अन्येश रॉय ने कहा, हमने भारत के साइबर अपराधों के हॉटस्पॉट जामताड़ा बेल्ट को टारगेट करते हुए 'साइबर प्रहार' भाग 2 लॉन्च किया है, इसमें जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह और जमुई शामिल है। एक बड़ी कार्रवाई में हमने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है जो वहां एक बड़ा रैकेट संचालित कर रहे थे। ये लोग मुख्य रूप से UPI भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी करते हैं। ये धोखेबाज पीड़ितों को यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
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इस तरह निकलवाते थे पैसे
डीसीपी अन्येश रॉय ने आगे कहा, आरोपी केवाईसी के नाम पर लोगों को डराते हैं कि उनका सिम या बैंक अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा। इसके बाद तकनीकी के इस्तेमाल से लोगों पर दबाव बनाते हैं कि वे यूपीआई से पेमेंट कर दें। हमने देखा है कि इन धोखेबाजों ने हाल के दिनों में तकनीकी के उपयोग में वृद्धि की है। पहले वे पीड़ितों को बेतरतीब ढंग से कॉल करते थे और बैंक डिटेल्स मांगते थे। वे अब इस मेथड का उपयोग नहीं करते हैं। वे अस्थायी वेबसाइट बनाते हैं और छोटे URL वाले कई संदेश भेजते हैं। गिरफ्तार किए गए ये 14 जालसाज 9 राज्यों के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 36 मामलों से जुड़े हैं।
36 लोगों से ठगे 1.2 करोड़ रुपए
डीसीपी अन्येश रॉय ने बताया, इन आरोपियों ने 36 अगल-अलग मामलों में 1.2 करोड़ रुपए की ठगी की है। उन्होंने रोजाना 4-5 लोगों को ठगने की बात स्वीकार की। इस रैकेट के मास्टरमाइंड अल्ताफ अंसारी उर्फ 'रॉकस्टार' और गुलाम अंसारी उर्फ 'मास्टर जी' हैं। अल्ताफ के अंडर में कई कॉलर काम करते हैं, किसी भी संभावित पुलिस गतिविधि पर नजर रखने के लिए वह लोगों को उस स्थान पर रखता है जहां से वह खुद काम करता है। गुलाम नकली वेबसाइट बनाने और उन्हें Google विज्ञापनों के माध्यम से ऑनलाइन प्रोग्रेस कराने में माहिर है। अल्ताफ एड कैंपेन चलाने के लिए रोजाना 40000 से 50000 रुपए देता था। एक और नई चीज जो हमने नोटिस की है वो ये है कि आरोपियों ने अपने काम में एरिया के हिसाब से बदलाव किया और विस्तार किया है।












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