Delhi-NCR में एयर टैक्सी चलाएगी बंग्लुरू की कंपनी, एक बार में कितनी बैठेंगी सवारी और कैसे उड़गी कैब?
Delhi NCR Air Taxi: सारला एविएशन द्वारा बनाई (हाफ-स्केल) के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग यानी eVTOL डिमॉन्स्ट्रेटर सिल्ला एसवाईएल-एक्स1 की ग्राउंड टेस्टिंग 22 दिसंबर, 2025 को कंपनी की बेंगलुरु स्थित परीक्षण सुविधा में सफलतापूर्वक पूरी हुई थी। अब चर्चा है कि यही कंपनी दिल्ली NCR में एयर टैक्सी चलाने जा रही है।
क्या है खासियत?
एसवाईएल-एक्स1 का विंगस्पैन (पंखों का फैलाव) 7.5 मीटर है। इसे भारत में अभी तक निजी स्तर पर विकसित हो रहे eVTOL विमानों में सबसे बड़ा और सबसे एडवांस मॉडल बताया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, इसे करीब नौ महीनों के भीतर तैयार किया गया। इसकी लागत भी ग्लोबल प्रोग्राम्स की तुलना में काफी कम रही, जो यह दिखाती है कि भारतीय इंजीनियरिंग टीमें कम बजट में भी हाई-लेवल टेक्नोलॉजी विकसित करने में सक्षम हैं।

एयर टैक्सी प्रोग्राम अब पहुंचा वेरिफिकेशन फेज में
ग्राउंड टेस्टिंग शुरू होने के साथ ही सारला एविएशन का एयर टैक्सी प्रोग्राम अब अपने मेन वेरिफिकेशन फेज को लगभग पूरा कर चुका है। इसका मतलब यह है कि कंपनी अब सिर्फ डिजिटल मॉडल या लैब-लेवल एक्सपेरिमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि असली विमान-स्तर पर टेस्टिंग कर रही है। यह कदम इस टेक्नोलॉजी को जमीन पर हकीकत बनाने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
क्या टेक्नोलॉजी है इसके पीछे?
इस डिमॉन्स्ट्रेटर को खासतौर पर स्ट्रक्चरल बिहेवियर, प्रोपल्शन इंटीग्रेशन और सिस्टम-लेवल सेफ्टी आर्किटेक्चर को बड़े पैमाने पर वैलिडेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यानी विमान की बॉडी कितनी मजबूत है, मोटर और पावर सिस्टम कैसे काम कर रहे हैं और सुरक्षा से जुड़े सभी सिस्टम कितने भरोसेमंद हैं- इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
एसवाईएल-एक्स1 को शुरुआत से ही सर्टिफिकेशन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह आगे चलकर 15 मीटर विंगस्पैन वाले फुल-स्केल विमान के लिए एक ब्रिज की तरह काम करेगा।
एक बार में कितने यात्री जाएंगे?
कंपनी का मुख्य प्रोग्राम एक छह-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी है। इसे खास तौर पर भारत के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और पुणे में ट्रैवल टाइम को काफी कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मकसद है कि जो सफर अभी घंटों में पूरा होता है, उसे मिनटों में बदला जा सके। साथ ही यह इमरजेंसी सर्विसेज के लिए बहुद उपोयगी साबित हो सकता है।
भारत में एडवांस्ड एयर मोबिलिटी का भविष्य
सारला एविएशन का यह कदम दिखाता है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि इनोवेशन का निर्माता भी बन रहा है। 22 दिसंबर, 2025 की यह ग्राउंड टेस्टिंग सिर्फ एक टेस्ट नहीं थी, बल्कि भारत के निजी एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक मजबूत संदेश था कि देश अब ग्लोबल लेवल पर एडवांस्ड एयर मोबिलिटी रेस में शामिल हो चुका है।
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