भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?
  • search

दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाने वाले अफसर, एक भुक्तभोगी यात्री की ये आपबीती जरूर पढ़ लें

By वरुण कुमार
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। आज सुबह ऑफिस के लिए निकला। 15 मिनट लेट था तो अंदाजा था कि मेट्रो में भीड़ मिलेगी, कितनी मिलेगी यह अंदाजा नहीं था। वैशाली मेट्रो स्टेशन पर पहुंचा तो समझ गया कि भीड़ बेहिसाब है और अगले दो घंटे बेहद बुरे रहने वाले हैं। स्वचलित सीढ़ियां चल रही थीं और लोग ऊपर जा रहे थे लेकिन लाइन वहां तक थी जहां सीढियां शुरु होती हैं यानि ऊपर खड़े होने की जगह नहीं थी। सोच कर देखिए जो शख्स सीढ़ी से ऊपर जा रहा है उसे ऊपर जगह नहीं मिल रही है लेकिन वह रुक नहीं सकता है क्योंकि सीढियां लगातार चल रही हैं।

    दिल्ली मेट्रो का हाल देखिए

    दिल्ली मेट्रो का हाल देखिए

    लोग चीखने लगे, चिल्लाने लगे, तब शायद किसी ने देखा सुना होगा और सीढियां बंद की गईं। अगर ये लोग पीछे गिर जाते तो शायद पूरी भीड़ गिर जाती और स्वचलित सीढियों के कारण बेहद बड़ा हादसा होता। इसके बाद जैसे तैसे मेट्रो में घुसा और फिर राजीव चौक पहुंचा लेकिन राजीव चौक पर हालात और विस्फोटक थे। सीढियों से भीड़ नीचे उतर रही थी लेकिन प्लेटफॉर्म भरे हुए थे। भीड़ पीछे से धक्का दे रही थी। मैं सोच रहा था कि अगर कोई पटरी पर गिर जाए तो क्या होगा।

    किराया बढ़ा क्या सुविधाएं बढ़ेंगी?

    किराया बढ़ा क्या सुविधाएं बढ़ेंगी?

    क्या होगा अगर भीड़ लगातार धक्का देती रहे और लोग पटरी पर गिरते रहें। और फिर अचानक ट्रेन आ जाए! क्या हो अगर किसी कारण कहीं कोई स्पार्क हो जाए और लोग डर कर भागने लगें? क्या हो अगर कोई अफवाह, छोटी मोटी घटना भगदड़ करा दे? भगदड़ में राजीव चौक जैसी जगह पर क्या होगा? क्या कोई अंदाजा लगा सकता है? मेट्रो स्टेशन्स पर भीड़ जिस कदर बढ़ रही है, हादसा तो होगा और पक्का होगा। कितने दिन भगवान भरोसे चलेगी मेट्रो?

    क्या यात्रियों को मिल सकेंगी जरूरी सुविधाएं

    क्या यात्रियों को मिल सकेंगी जरूरी सुविधाएं

    ये भीड़ टाइम बम है जो फटने वाला है। किसी भी वक्त। हमारा सिस्टम इस भीड़ को रोकने में नाकाम है, हमारा सिस्टम मेट्रो की क्षमता बढ़ाने में नाकाम है, हमारा सिस्टम इंतजार करता है हादसे का। हादसे के बाद मुआवजा बांटने से बेहतर है हादसे को होने से पहले ही रोक दिया जाए। सरकार कारपूल चाहती थी, हमने वो किया, बाइक पूल चाहती थी, वो भी किया। इवन-ऑड भी किया लेकिन फर्क क्या पड़ा? सरकार ने मेट्रो के किराए बढा दिए हमने वो भी दिए लेकिन बदले में हम अमानवीय परिस्थियों में यात्रा करते हैं और इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।

    एक भुक्तभोगी यात्री ने बयां किया हाल

    एक भुक्तभोगी यात्री ने बयां किया हाल

    तस्कर गायों को कैंटर में बेदर्दी के साथ भर देते हैं। 10 की जगह में 50। ऐसा ही मेट्रो में हमारे साथ होता है। जानवरों जैसी हालत में हम सफर करते हैं क्योंकि हम वोट देते हैं, टैक्स देते हैं वो सब करते हैं जो सरकार चाहती है लेकिन हमें बदले में मिलते हैं बद से भी बदतर हालात।

    मेट्रो किराये में किया गया है इजाफा

    मेट्रो किराये में किया गया है इजाफा

    जो भी इस लेख को पढ़ रहा है उससे उम्मीद करता हूं कि वो देश के नेताओं को टैग करके इस लेख को सोशल मीडिया पर शेयर करेगा क्योंकि सरकारों को सुनाने के लिए धमाके की नहीं सोशल मीडिया की जरूरत होती है।

    इसे भी पढ़ें:- दिल्ली मेट्रो के नाम एक यायावर की चिट्ठी, आशा है ये महंगा सफर सुरक्षित और सुहाना होगा

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Delhi Metro Fare, Delhi Metro Fare Hike, Delhi Metro Fare Price

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more