62 मिनट में दिल्ली से मेरठ का सफर, दिल्ली सरकार की हरी झंडी का इंतजार
एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की टीम ने अपने प्रजेंटेशन के साथ दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से मुलाकात की थी जिसमे उन्होंने जल्दी ही इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने का आश्वासन दिया है
नई दिल्ली। दिल्ली से मेरठ का सफर मात्र 62 मिनट में तय करने का सपना जल्दी ही पूरा हो सकता है। बस इसे दिल्ली सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को उत्तरप्रदेश सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। दिल्ली सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से भी हरी झंडी लेनी होगी।

एनसीआरटीसी ने दिया प्रजेंटेशन
एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की टीम ने अपने प्रजेंटेशन के साथ दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से मुलाकात की थी जिसमे उन्होंने जल्दी ही इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने का आश्वासन दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक कैलाश गहलोत ने कहा' दिल्ली से मेरठ मात्र 62 मिनट में पहुंचाने का ये बेहतरीन आइडिया है, फाइल मेरे पास आई है जल्दी ही इसको पास कर दिया जाएगा'

यूपी सरकार दे चुकी है मंजूरी
जानकारी के मुताबिक डीपीआर में इस कॉरीडोर की अनुमानित लागत 33 हजार करोड़ आंकी गई है। इसमें से पांच हजार करोड़ उत्तर प्रदेश सरकार, एक हजार करोड़ दिल्ली सरकार और छह हजार करोड़ केंद्र सरकार को देना है। जबकि 20 हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया जाएगा। आला अधिकारियों के मुताबिक एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की बोर्ड बैठक में स्वीकृत होने के बाद दिल्ली- गाजियाबाद और मेरठ कॉरीडोर की डीपीआर दिसंबर 2016 में एक साथ उत्तर प्रदेश सरकार और दिल्ली सरकार को उनकी स्वीकृति के लिए भेजी गई थी। उस दौरान उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल चल रहा था। मार्च 2017 में वहां नई सरकार बनी और मई 2017 में इस डीपीआर को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी दी। हालांकि दिल्ली सरकार ने अभी तक योजना को स्वीकृत नहीं दी है।

कुल 17 स्टेशन होंगे
दिल्ली-एनसीआर को रैपिड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जोड़ने के लिए एनसीआरटीसी का गठन किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत ट्रेन दिल्ली के सराय कालेखां से गाजियाबाद होते हुए मेरठ तक जाएगी। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल की स्पीड 160 किमी प्रति घंटे की होगी और 2024 तक इस रेल प्रोजेक्ट को तैयार होने की समय सीमा तय की गई है। उस वक्त तक ट्रेन में 7.91 लाख यात्रियों के रोजाना सफर करने का अनुमान है। कॉरिडोर पर कुल 17 स्टेशन बनेंगे जिसमें दो स्टेशन दिल्ली में बनेंगे।कॉरिडोर का 30.24 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड होगा वहींकॉरिडोर का 60.35 किमी हिस्सा एलिवेटेड होगा। कॉरिडोर में यमुना नदी के नीचे अंडरग्राउंड टनल बनाने का प्लान है।ट्रेन में कुल 12 कोच का प्रस्ताव है।कोच में बसों की तरह दोनों तरफ दो-दो सीटें होंगी।












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