MCD: AAP ने शैली ओबेरॉय को बनाया मेयर पद का प्रत्याशी, मोहम्मद इकबाल लड़ेंगे डिप्टी मेयर का चुनाव
6 जनवरी को दिल्ली नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। AAP की ओर से शैली ओबेरॉय और आले मोहम्मद इकबाल मैदान में हैं।

दिल्ली की जनता ने इस बार एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी पर भरोसा जताया। जिस वजह से पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। अगले महीने 6 जनवरी को मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव होने हैं, जिसमें सभी पार्षद वोट डालेंगे। इस चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। जिसके तहत शैली ओबेरॉय मेयर पद का चुनाव लड़ेंगी, जबकि मोहम्मद इकबाल डिप्टी मेयर पद के लिए मैदान में उतरेंगे। पार्टी ने भरोसा जताया है कि उसके दोनों उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे।
पूर्ण बहुमत हासिल कर चुकी आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को पीएसी की बैठक बुलाई थी। जिसमें कई नामों पर मंथन किया गया। इसके बाद पार्टी ने शैली और आले मोहम्मद इकबाल का नाम फाइनल किया। मोहम्मद इकबाल के पिता शोएब इकबाल मटिया महल से विधायक हैं। इसके अलावा स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य के लिए आमिल मलिक, रविंद्र कौर, मोहिनी जीनवाल और सारिका चौधरी का नाम फाइनल हुआ। AAP के मुताबिक 6 जनवरी को मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव होंगे। इसके लिए नामांकन की आखिरी तारीख 27 दिसंबर है। ऐसे में उन्होंने आज प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर दिए, जो जल्द ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
क्या है MCD का समीकरण?
दिल्ली में पहले तीन नगर निगम हुआ करते थे, लेकिन केंद्र सरकार ने कुछ महीनों पहले तीनों का विलय कर दिया। अब दिल्ली नगर निगम में कुल 250 सीटें हैं। जिसमें आम आदमी पार्टी ने 134 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी के खाते में 104 सीटें आईं। अब 6 जनवरी को मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए वोटिंग होगी। इस चुनाव में 250 पार्षदों के साथ दिल्ली के 7 लोकसभा, 3 राज्यसभा सांसद और 13 विधानसभा सदस्य भी वोट डालेंगे। ऐसे में कुल 273 मत पड़ेंगे, जिसमें बहुमत का आंकड़ा 133 है। आम आदमी पार्टी के पास 134 पार्षद और 3 राज्यसभा सांसद हैं।
पार्षदों की हो सकती है जोड़-तोड़
मेयर पद के चुनाव में बीजेपी और AAP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों के दल-बदल को रोकना है। नियम के मुताबिक अगर कोई पार्षद पार्टी बदलता है या दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देता है तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जबकि विधानसभा सदस्य या सांसद जब पार्टी बदलते हैं तो उनकी सदस्यता खत्म हो जाती है।












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