दिल्ली में संकट, सबका अपमान करते सीएम केजरीवाल

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) आम आदमी पार्टी सरकार को लेकर जो चिंताएं थी, वह साबित होने लगी हैं। पर अरविंद केजरीवाल लगता है कि किसी का सम्मान करना नहीं जानते। वे उपराज्यपाल नजीब जंग से लेकर शिखर अफसरों को अपमानित कर रहे हैं।

पिछली चौदह फरवरी को जिस गर्मजोशी से दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी मंत्रियों को दिल्ली के रामलीला मैदान में शपथ दिलाई थी तब लगा था कि एक फिर से इस शहर में एक नई राजनीति का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

क्षणिक रहा विवाद

दिल्ली की संविधानिक स्थिति को पूर्व मुख्यमंत्री भलिभांति समझते रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के साथ कोई टकराव बना भी तो वह क्षणिक ही रहा।

सहज हालात नहीं

वरिष्ठ पत्रकार हबीब अख्तर कहते हैं कि अन्य दलों के मुख्यमंत्रियों की तुलना में आम आदमी पार्टी के नेता मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के लिए स्थिति सामान्य और सहज नहीं हैं।

बड़ा बहुमत

इसमें कोई संदेह नहीं कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ऐतिहासिक बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में आए हैं लेकिन संविधानिक प्रावधान, इसकी व्यवस्थाएं अनुच्छेद और धाराएं जो कहती हैं उसके तहत उन्हें चलना होगा। केजरीवाल के सत्तासीन होने पर यहां के लाखों लोगों को लगा था कि अब उनकी आकांक्षाएं और सपने साकार होंगे।

इतिहास लिखेंगे

हबीब अख्तर कहते तब यह भी भरोसा जगा था कि दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल मिलकर इस शहर में एक नया इतिहास लिखेंगे।

सब जानते हैं कि शिक्षाविद एवं संवेदनशील नौकरशाह नजीब जंग का इस शहर से बहुत आत्मीय नाता है वह ऐसे हर कार्य को किए जाने में सहयोगी रहेंगे जो यहां के लोगों के लिए शुभ है। लेकिन ताजे घटनाक्रमों से लग रहा है शासन की यह युगलबंदी असहज हो गई है।

जिस तरह से जनता के बहुमत से अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुखिया बने हैं उसी तरह से नजीब जंग भी संविधानिक दृष्टि से दिल्ली के मुख्य प्रशासक हैं। उनकी मर्जी के बिना चुनी हुई सरकार किसी तरह के महत्त्वपूर्ण निर्णय नहीं ले सकती है।

बता दें कि मौजूदा संविधानिक व्यवस्थाओं में दिल्ली में चुनी हुई कोई भी सरकार हो उसे उपराज्यपाल के विवेक एवं निर्देशों का आदर करना होगा। जहां वे दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं वहीं वे एक मायने में दिल्ली की सरकार हैं।

उपराज्यपाल ही खास

दिल्ली की सरकार का मतलब उपराज्यपाल ही हैं। यहां की कोई भी सरकार उपराज्यपाल को नजरअन्दाज नहीं कर सकती। उन्हें नजरअंदाज करने का मतलब संविधानिक संकट को न्योता देना है। वे केन्द्र सरकार के प्रति पूर्णत: जवाबदेह हैं।

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