My Voice: केजरीवाल जी आप आए पर क्या लाए?

[अन्नू मिश्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय] दिल्ली में आप की सरकार क्या बनी दिल्ली का नक्शा ही बदल गया। पहले हालत बद थी तो अब बद्तर हो गई। क्या सोचा था दिल्ली की जनता ने कि आप को जिताएंगे तो आप खुश होगा, ईनाम देगी दिल्ली का विकास होगा, भ्रष्टाचार मिटेगा, दिल्ली सुरक्षित होगी, हाँ आप तो जरूर खुश हुई पर जब बात ईनाम की आई तो ईनाम तो नहीं पर सवाल जरूर मिला कि क्या ऐसा हुआ?

My Voice: Delhi student raises questions against Arvind Kejriwal

विकास तो दूर की बात है जो था वो भी टिका रह जाए तो वो दिल्ली की जनता की खुदकिश्मती होगी। अगर बात करें भ्रष्टाचार की तो पहले स्थिति 19 थी अब 20 हो गई। पटरी दुकानदारों को बड़ी उम्मीद थी केजरीवाल जी से, मगर क्या पता था कि आप सरकार आएगी तो उनकी उम्मीदों का जनाज़ा निकल जाएगा। बेचारे आज भी दुखी हैं हफ्ता वसूली से।

जो डर केजरीवाल की सरकार ने अपनी 49 दिन के शासन में कायम किया था उसका 1 फीसदी प्रभाव भी अब नहीं दिखता। दिल्ली में अब केवल मनमानी की सरकार है कहें तो सरकार का मूड हुआ तो माशल्लाह, नहीं तो स्थिति ऐसी है कि कभी-कभी दिल्ली की जनता यह भी भूल जाती है कि दिल्ली में कोई सरकार भी है।

सुरक्षा तंत्र की उड़ी धज्ज‍ियां

सुरक्षा की तो जनाब बात ही मत पूछिए हालत ऐसी है कि अब अपने ही ऐरिया से घूम कर सुरक्षित होकर घर लौट आए तो भी बड़ी बात है। अपराधियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि अब उन्हें इस बात की परवाह ही नहीं कि दिन है या रात, जगह सूनसान है या भीड़ वाली। ऐसा लगता है कि सरकार के आने से उन्हें अपराध करने का लाइसेंस मिल गया हो।

अगर सर्वे किया जाए तो दिल्ली की आधी आबादी यही कहेगी कि काश हमारे पास वोट वापस लेने का अधिकार होता तो इस सरकार से मुक्ति मिलती। इतनी बुरी स्थिति तो कांग्रेज के राज में भी नहीं थी। आखिर मिला क्या दिल्ली की जनता को केवल निराशा के अलावा।

केजरीवाल जी आज दिल्ली की जनता आपसे सवाल पूछती है कि आखिर क्या हुआ आपके वादों का, क्या किया आपने दिल्ली की जनता के लिए, क्या कर रहें आप महिलाओं की सुरक्षा के लिए।

कैसे विश्वास करे जनता?

जब आपकी पार्टी में ही विश्वास की इतनी कमी है तो कैसे विश्वास करें जनता आप पर। आखिर कैसे उम्मीद की जाए दिल्ली में कानून व्यवस्था की बहाली की जब कानून मंत्री ही खुद शक के घेरे में हैं। लोकतंत्र का मतलब तो आपने खूब जोर-शोर से समझाने का जिम्मा लिया पर क्या आपके राज में लोकतंत्र केवल अपराध-अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए है।

अगर जनता आपका ही तरीका अपनाए तो दिल्ली में हर रोज हजारों की संख्या में जनता धरना-प्रदर्शन करती दिखेगी। जनता जाग चुकी है अब आप को भी जाग जाना चाहिए। दिल्ली की जनता का भविष्य तो खतरे में पड़ ही गया कहीं ऐसा न हो कि आप का भविष्य भी खतरे में पड़ जाए। अगर आप लॉन्ग टाइम बैनिफिट चाहती है तो अब कम से कम शॉर्ट इफेक्ट भी तो शुरु कीजिए। अब तो मन में बस यही ख्याल आता है कि अच्छा होता कि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन ही लगा रहता।

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