दिल्ली हाईकोर्ट ने निगमबोध घाट की खराब CNG भट्ठियों पर लिया स्वत: संज्ञान
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को निगमबोध घाट और पंजाबी बाग श्मशान पर शवों को जलाने के लिए लगाए गए सीएनजी सिस्टम के काम न करने पर रिपोर्ट्स पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उधर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि, सरकार हर जिले के लिए कम से कम दो फूड हेल्पलाइन नंबर जारी करे।

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बता दें कि, दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल लोकनायक अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में 108 लाशें रखी हुई हैं। हालत इस कदर खराब है कि शवगृह में 28 शवों को फर्श पर एक के उपर एक रखा गया है क्योंकि लाशों को रखने के लिए बनाए गए 80 रैक पहले से भरे हुए हैं।

अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक मंगलवार को दिल्ली के निगमबोध श्मशान घाट से 8 शवों को वापस अस्प्ताल लौटा दिया गया क्योंकि वहां और शवों के संस्कार के प्रयाप्त उपाय नहीं थे। आपको बता दें कि निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार के लिए 6 सीएनजी भट्टियां हैं जिनमें से सिर्फ 2 ही काम कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि लोकनायक अस्पताल दिल्ली का सबसे बड़ा कोरोना अस्पताल है। इसके पोस्टमार्टम हाउस में सिर्फ उन लोगों के शव रखे गए हैं जिनकी मौत कोरोना वायरस से हुई है या वायरस संक्रमण की आशंका है। शवों को पीपीई किट में लपेट कर रखा गया है। जो कर्मचारी यहां ड्यूटी पर लगे हैं वो भी पीपीई किट पहनकर ही काम कर रहे हैं।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि हम 5 दिन पहले मरने वालों के शव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। हर दिन ऐसे मामलों का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। पीपीई किट पहने हम श्मशान के बाहर इस तेज धूप वाली गर्मी में खड़े रहते हैं। हम शाम को ही बता पाने में सक्षम होते हैं कि और वो शवों को ले सकते हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में आज 28 लाशें एक के उपर एक रखी हुई हैं। पिछले हफ्ते वहां 34 लाशें थीं।












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