दिल्‍ली हाई कोर्ट ने कहा- गोवा बार की मालकिन नहीं हैं स्मृति ईरानी, उनकी प्रतिष्‍ठा को चोट पहुंचाई गई

दिल्‍ली हाई कोर्ट ने कहा- गोवा बार की मालकिन नहीं स्मृति ईरानी, उनकी प्रतिष्‍ठा को चोट पहुंचाई गई

नई दिल्ली, 01 अगस्‍त : विपक्षी नेताओं ने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पोस्‍ट लिखकर आरोप लगाया था कि स्‍मृति ईरानी की बेटी बिना लाइसेंस के गोवा में बार चला रही है। जिसके बाद केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने केस दर्ज करवाया था। केंद्रीय विकास मंत्री ने कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

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    Goa Bar Row: Smriti Irani और उनकी बेटी को Delhi High Court से मिली.. ? | वनइंडिया हिंदी *News
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    वहीं आज दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज इस मामले में सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और न ही उनकी बेटी जोइश गोवा बार या रेस्तरां की मालिक हैं। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ हो चुका है कि इन दोनों के नाम आज तक कभी कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ है।

    कांग्रेस नेताओं ने लगाया था ये आरोप

    बता दें ये विवाद जुलाई महीने के अंत में शुरू हुआ गोवा में बेटी द्वारा बार चलाए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने मंत्री स्‍मृति ईरानी को मोदी कैबिनेट बर्खास्त करने की मांग की थी। उन्‍होंने आरोप लगाया था कि स्‍मृति ईरानी की बेटी गोवा में एक अवैध बार चला रही है।

    कांग्रेस नेताओं से दो करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना मांगा है

    जिसके बाद मंत्री स्‍मृति ने दावा कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मेरे मुखर रुख के कारण गांधी परिवार के इशारे पर "दुर्भावनापूर्ण" आरोप लगाया गया। ईरानी ने अपने और अपनी 18 वर्षीय बेटी के खिलाफ कथित रूप से निराधार और झूठे आरोप लगाने के लिए कांग्रेस नेताओं से दो करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना मांगा है। कांग्रेस नेताओं द्वारा उनके द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब देने में विफल रहने के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

    HC ने जयराम रमेश, पवन खेरा और नेट्टा डिसूजा को समन जारी किया था

    गौरतलब है कि पिछले हफ्ते शुक्रवार को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेरा और नेट्टा डिसूजा को समन जारी किया था और उन्हें केंद्रीय मंत्री और उनकी बेटी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर ट्वीट और अन्य सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ये भी कहा था अगर वो लोग नहीं हटाते हैं तो सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म स्‍वयं ये विवादित पोस्‍ट डिलीट कर दें।

    कोर्ट ने कहा स्‍मृति ईरानी की प्रतिष्‍ठा को चोट पहुंचाइ गई
    कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंशों को देखने के बाद पहली नजर में वादी के खिलाफ वास्तविक तथ्यों की पुष्टि किए बिना बदनामी के आरोप लगाए गए। ऐसा करके वादी की प्रतिष्ठा को गंभीर चोट पहुंचाई गई है। प्रतिवादियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कारण किए गए ट्वीट और रीट्वीट, "न्यायाधीश ने पिछले हफ्ते कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई टिप्पणी को 'बदनाम' और 'फर्जी' करार दिया था।

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