दिल्ली दंगों की जांच पर पुलिस को कोर्ट की फटकार, आधी-अधूरी चार्जशीट और खराब इन्वेस्टिगेशन को लेकर लगाई क्लास

नई दिल्ली, 30 अगस्त। देश की राजधानी में हुए कई दंगों की जांच को लेकर दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकतर दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस की जांच बहुत ही खराब है। यही नहीं पुलिस इस तरह के मामलों में आधी-अधूरी चार्जशीट दायर कर रही है। अडिशनल सेशन के जज विनोद यादव ने यह टिप्पणी दंगों में अशरफ अली, परवेज को चार्जशीट में शामिल करने के मामले पर सुनवाई के दौरान की है। दंगों में आरोपियों पर आरोप तय करने को लेकर कोर्ट ने कहा, यह बात सामने आई है कि पुलिस आधी-अधूरी चार्जशीट कोर्ट में फाइल कर रही है, पुलिस जांच को तार्कित अंत तक ले जाने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। जिन लोगों कई मामलों में आरोपी बनाया गया है वो इन अधूरी चार्जशीट और जांच की वजह से काफी समय से जेल में सड़ रहे हैं।

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    Delhi Violence Case: Delhi Police को कोर्ट की फटकार, आधी-अधूरी चार्जशीट पर क्लास | वनइंडिया हिंदी
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    कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लें और इस मामले में जो जरूरी कदम उठाने की जरूरत हैं उसे उठाएं। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि पुलिस अधिकारी जांच के लिए मामलों के एक्सपर्ट की सलाह और मदद लेने के लिए स्वतंत्र हैं जिससे कि जिन लोगों का नाम बतौर आरोपी शामिल किया जा रहा है उनके साथ अन्याय ना हो। इससे पहले कोर्ट ने कहा कि यह पीड़ादायक है कि दंगों के बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं क्योंकि चार्जशीट फाइल नहीं की जा सकी है। अधिकतर मामलों में जांच अधिकारी ही कोर्ट में पेश नहीं हुए, ये ना तो खुद कोर्ट आए और ना ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

    कोर्ट ने कहा कि हमे यह बात समझ आई है कि कि जांच अधिकारी इस तरह के मामलों में स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर के सामने तथ्य नहीं रख रहे हैं। सुबह मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने चार्जशीट की पीडीएफ इमेल कर दी और मामले की बहस करना का जिम्मा अकेले एसपीपी पर ही छोड़ दिया। उन्हें मामले की गहराई तक जाने का मौका तक नहीं दिया गया ताकि वह तथ्यों की पड़ताल कर सके। जज विनोद यादव ने कहा कि यह दुखद है कि अधिकतर मामलों में जांच बहुत ही खराब है। ना तो जांच अधिकारी और ना ही एसएचओ मामलों की जांच को देख रहे हैं। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि मामले की जांच में किन अन्य चीजों की जरूरत है।

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