दरियागंज हिंसा: पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना को मिली जमानत, पासपोर्ट जमा करने को कहा गया

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को पिंजरा तोड़ संगठन की महिला सदस्य देवांगना कलीता को जमानत दे दी है। कलीता पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुई हिंसा में लिप्त होने का आरोप है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय ने कलीता को 30,000 रुपये के जमानत बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर जमानत दी। उसे पासपोर्ट जमा कराने को भी कहा गया है। कोर्ट ने कलीता को कहा है कि वह ऐसी किसी गतिविधि में शमिल न हो और जांच एजेंसी को सहयोग करे। साथ ही अगले आदेश तक उसे अपना पासपोर्ट जमा करने को भी कहा गया है।

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यह ऐसा तीसरा मामला है, जिसमें कलीता को रविवार को गिरफ्तार किया गया था और तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। इससे पहले भड़काऊ भाषण देने के आरोप में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को भी बीते साल दिसंबर माह में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे भी जमानत मिल गई थी। कलीता को इससे पहले फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि दिसंबर हिंसा मामले में अब तक की गई जांच में धारा 325 (जानबूझ कर किसी को स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और धारा 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) के तहत कलीता को जिम्मेदार ठहराए जाने के कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिले हैं। इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि सीसीटीवी फुटेज से भी साफ तौर पर ये नहीं दिख रहा कि वह दंगे में शामिल थी।

अदालत ने कहा, कथित तौर पर आरोपी (कलीता) ने सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर, NRC बिल के विरोध में हिस्सा लिया था, लेकिन अब तक की जांच से पता चला है कि आरोपी को लेकर कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है, जिससे ये साबित हो कि वह आईपीसी की धारा 325 और 353 के तहत दोषी है। मामले में अदालत ने कहा कि मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) में घायल व्यक्तियों के विवरणों के आधार पर जांच की गई।

वहीं कॉल डाटा रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह अपराध के समय घटना स्थल पर मौजूद थी। अदालत ने कहा कि ऐसे में जमानत से इनकार करने के लिए अभियुक्त के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिलते हैं। इसके साथ ही कलीता के पास लैपटॉप या फोन में ऐसी सामग्री भी नहीं मिली है, जिसके कारण उसे जेल में रखा जा सके।

दिल्ली के चांदबाग इलाके में हुए दंगे पर पुलिस ने अपनी चार्जशीट फाइल की

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