जीबी रोड के कोठा मालिकों को समन, पढ़ें बदनाम गली की दर्दनाक दास्तां
नई दिल्ली। दिल्ली का जीबी रोड भारत के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में गिना जाता है। यहां कई कोठे हैं और उनमें हजारों की तादाद में वेश्याएं। जीबी रोड वैसे तो केवल एक गली है, लेकिन यहां दो दुनिया बसती है। दिन में जहां लोगों की चहल-पहल से हार्डवेयर का बाजार रोशन रहता है तो वहीं रात होते ही एक अजीब सा सन्नाटा पसर जाता है। और इस सन्नाटे में दिखती है देह व्यापार की दूसरी दुनिया।


महिला आयोग ने कोठा मालिकों को भेजा समन
इसी दूसरी दुनिया की सच्चाई पता लगाने के लिए दिल्ली महिला आयोग ने गुरुवार को 125 कोठा मालिकों को समन भेजा है। आयोग ने इन्हें अपने असली पहचान पत्र के साथ 21-24 सितंबर के बीच पेश होने के लिए कहा है। ये समन कोठों की असलीयत पता लगाने के लिए भेजे गए हैं।

नीचे दुकाने और ऊपर चलते हैं कोठे
गार्स्टिन बास्टिन रोड का नाम तो साल 1996 में ही बदल कर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग किया जा चुका है लेकिन लोग आज भी इसे जीबी रोड के ही नाम से जानते हैं। यहां कई मल्टी स्टोरी बिल्डिंग हैं जिनके नीचे हार्डवेयर का काम होता है। जैसे ही ये दुकानें शाम को बंद होती हैं, वैसे ही इनके ऊपर बने कोठों का काम शुरू हो जाता है।

नर्क से कम नहीं है यहां जिंदगी
जीबी रोड पर बने कोठों में रह रही महिलाओं की जिंदगी किसी नर्क से कम नहीं होती। कई औरतें यहां ऐसी हैं जिनके पास अपने निजी कमरे भी नहीं हैं जहां वो आराम से बैठ सकें। अधिकतर महिलाएं कोठों के वरांडा में सोती हैं। जिनके पास कमरे हैं, वो भी काफी छोटे हैं और 1-2 से ज्यादा लोग वहां नहीं रह सकते।

अलग-अलग जगह से लाई जाती है लड़कियां
यहां देह व्यापार में लिप्त लड़कियां देश के अलग-अलग हिस्सों से तस्करी के जरिये लाई जाती हैं। नेपाल और बांग्लादेश से भी दलाल लड़कियों को अच्छे भविष्य का सपना दिखाकर यहां दलदल में खींच लाते हैं। जीबी रोड के कोठों में कितनी लड़कियां हैं, इसके आंकड़े कभी साफ नहीं हो पाए।












Click it and Unblock the Notifications