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भारत-चीन विवाद के बीच राजनाथ सिंह जाएंगे लद्दाख, सैन्य तैयारियों का लेंगे जायजा

Defense Minister Rajnath Singh will visit Ladwakh on Friday, will meet injured soldiers

नई दिल्ली। पूर्वी लद्वाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लगातार बना हुआ है और चीन की सेना अपने रुख में किसी भी तरह का बदलाव करती नजर नहीं आ रही है। वहीं 15 जून को लद्वाख, गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों और चीनी सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच वार्ता की जा रही है। इसी बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को लद्वाख के दौरें पर जा रहे हैं। सीमा पर राजनाथ सिंह सीमा पर तैनात सैनिकों और सेना कमांडरो से मिलेंगे और लद्दाख सीमा पर सैन्य तैयारियों का जायजा लेंगे।

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    रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई सूचना के आधार पर गलवान घाटी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाना ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक स्थिति पर नियंत्रण रेखा के साथ-साथ चीनी आक्रमण की स्थिति की समीक्षा करने के लिए लेह का दौरा करेंगे। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लद्दाख में राजनाथ सिंह घायल सैनिकों से मुलाकात करने के लिए अस्पातल भी जाएंगें। राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने भी शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख के दौरा पर होंगे।

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    बता दें सरकार के सूत्रों के अनुसार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पूर्वी लद्दाख में तकरीबन 20000 जवानों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यान एलएसी पर तैनात कर दिया है। हालांकि भारत इस इलाके में अपनी पैनी नजर बनाए हुए है, लेकिन इन सब के बावजूद चीन की ओर से तकरीबन 10- 12 हजार सैनिको को जिनजियांग में हाई मोबिलिटी वेहिकल और बड़े हथियार के साथ भेजा गया है। यहां से ये सैनिक भारत के फ्रंट पर महज 48 घंटे के भीतर पहुंच सकते हैं।

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    सूत्र के अनुसार चीन की सेना ने दो डिवीजन जिसमे तकरीबन 20000 जवान हैं उन्हें पूर्वी लद्दाख सेक्टर के एलएसी पर तैनात किया है। इसके अलावा 10 हजार अन्य सैनिकों को भी उत्तरी जिनजियांग प्रांत में तैनात किया गया है। इन्हें महज 48 घंटे भीतर भारत के फ्रंट पर पहुंचाया जा सकता है। दरअसल यहां का इलाका समतल है, इसकी वजह से सैनिकों को मोबिलाइज करने में आसानी होती है और इन्हें महज 48 घंटों के भीतर भारत के फ्रंटियर तक भेजा जा सकता है।

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