Defence Expo 2018: शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा डिफेंस एक्सपो, जानिए 5 बड़ी बातें
चेन्नई। तमिलनाडु के दक्षिण चेन्नई के तिरुविदाताई में डिफेंस एक्सपो इंडिया-2108 का आयोजन आज (11 अप्रैल) से शुरू हो रहा है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। इस डिफेंस एक्सपो में देश के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। डिफेंस एक्सपो 2018 के तहत पहली बार दुनिया की कई कंपनियों के सामने भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को प्रोजेक्ट किया जाएगा। चार दिन तक चलने वाले इस डिफेंस एक्सपो का थीम 'India: The Emerging Defence Manufacturing Hub' है।

670 डिफेंस फर्म हिस्सा ले रही है
इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, अफगानिस्तान और स्वीडन, फिनलैंड, इटली, मैडागास्कर, म्यांमार, नेपाल, पुर्तगाल, सेशेल्स और वियतनाम सहित 47 देशों की देशों की भागीदारी को देखा जाएगा। इसमें कुल 670 डिफेंस फर्म हिस्सा ले रही है, जिसमें 154 विदेशी कंपनियां है। डिफेंस एक्सपो के लिए कुल 2,90,000 वर्ग फुट के क्षेत्रफल में प्रदर्शनी की जाएगी, जो अभी तक सभी प्रदर्शनियों में सबसे बड़ी है।

ये बड़ी भारतीय कंपनियां हुई शामिल
इस साल भारतीय भागीदारी में टाटा, एलएंडटी, कल्याणी, भारत फोर्ज, महिंद्रा, एमकेयू, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), भारत डायनेमिक्स (बीडीएल), भारत अर्थ गोवा शिपयार्ड (जीएसएल), हिंदुस्तान शिपयार्ड (एचएसएल), माजगॉन डॉक (एमडीएल), गार्डन रीच शिपबल्ल्डर एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और मिश्र धातू निगम लिमिटेड (मिधानी) समेत कई कंपनियां दिख रही है।

लॉकहीड मार्टिन समेत कई कंपनियां भी दिखी
वहीं, अगर इंटरनेशनल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की बात करे तो दुनिया की सबसे बड़ी वेपंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में से एक लॉकहीड मार्टिन, बोइंग (यूएसए), साब (स्वीडन), एयरबस, राफेल (फ्रांस), रोजोनबोरोन एक्सपोर्ट्स, यूनाइटेड शिप बिल्डिंग (रूस), बीएई सिस्टम्स (यूके), सिबात (इजरायल), वर्टिसिला (फिनलैंड), रोड एंड श्वार्ज (जर्मनी) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इस प्रदर्शनी में शामिल हुई है।

भारत की प्राइवेट और सरकारी डिफेंस कंपनियों ने लिया भाग
भारत के स्वदेशी विकसित भूमि, वायु और नौसेना के लिए तैयार किए गए डिफेंस सिस्टम को इस प्रणाली का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शित किए जाने वाले हथियारों और प्लेटफार्म में तेजस लड़ाकू विमानों और डीआरडीओ द्वारा डिजाइन अर्जुन मार्क 2 टैंक, धनुष तोपखाने के बंदूकें आदि शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में भारत की पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की डिफेंस कंपनियां मौजूद होगी।

एशिया-अफ्रीका में भारतीय हथियारों की मांग
हथियार खरीद मामले में भारत सबसे बड़ा देश है, लेकिन अब सरकार चाहती है कि हम खुद एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप मे उभरे। सरकार अपने घरेलू डिफेंस कंपनियों को प्रमोट करना चाहती है, ताकि विदेशी हथियारों की खरीद को कम किया जा सके। हाल ही में दक्षिण एशिया, अफ्रीका और आसियान देशों में भारतीय हथियारों की मांग भी बढ़ी है।
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