मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार चौथे महीने गिरावट, जुलाई में जून से भी नीचे

नई दिल्ली। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जुलाई में लगातार चौथे महीने गिरावट दर्ज की गई है। इसमें सबसे चिंता की बात ये है कि जुलाई में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का क्रय प्रबंधक सूचकांक (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) यानी पीएमआई जून से भी कम रहा है जबकि जून के बाद जुलाई में लॉकडाउन में कई छूट दी गईं। आईएचएस मार्किट के मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में पीएमआई जुलाई में 46 अंक पर रहा, वहीं ये इससे पहले महीने यानी जून में यह 47.2 पर था। जून से जुलाई में इसमें 1.2 अंक की गिरावट है। भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रैल से लगातार कमी दर्ज की जा रही है।

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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) इस साल जनवरी में 55.3 अंक पर था। फरवरी 2020 में ये 54.5 और मार्च में 51.8 अंक पर था। मार्च के आखिर में लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद ये सेक्टर धड़ाम हो गया। अप्रैल में ये 27.4 अंक पर रहा। इस दौरान देश में सभी कामकाज पर रोक लगा दी गई थी। मई में ये 30.8 पर रहा। जून में लॉकडाउन में छूट दी गई तो कुछ सुधार देखने को मिला और पीएमई 47.2 तक पहुंचा। जुलाई में इसके और बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन आशा के उलट ये घटकर 46 अंकों पर आ गया।

पीएमआई में इंडेक्स के 50 से नीचे रहने का मतलब सेक्टर का प्रोडक्शन गिरना होता है। इंडेक्स के 50 से ऊपर रहने का मतलब यह होता है कि प्रोडक्शन बढ़ा है। इसमें गिरावट या बढ़ोतरी जितना ज्यादा होती है, इंडेक्स 50 से उतना ही ज्यादा नीचे या ऊपर होता है। सेक्टर में गिरावट की वजह कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पादों के मांग में कमी आना है। लंबे लॉकडाउन के बाद मांग कमजोर रहने से कल कारखानों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में तो कमी की ही है, खरीद गतिविधियां भी कम हुई हैं।

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