'15 दिनों के अंदर माफी मांगो', कौन हैं Dr. Baidyanath Ghosh? जिन्होंने भेजा ममता समेत TMC नेताओं को नोटिस

Who is Dr. Baidyanath Ghosh: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तिदार के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने ममता बनर्जी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक औपचारिक लीगल नोटिस भेजा है।

'15 दिनों के अंदर माफी मांगो'

इस कानूनी नोटिस में पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा और वरिष्ठ नेता सोनाली गुहा के नाम भी शामिल हैं। डॉ. बैद्यनाथ ने इन सभी नेताओं से 15 दिनों के अंदर सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने और अपने बयानों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि उचित जवाब न मिलने पर वह आगे मानहानि का मुकदमा शुरू करेंगे।

Dr Baidyanath Ghosh

डॉ. बैद्यनाथ ने ये लीगल नोटिस उन आरोपों के जवाब में भेजा गया था जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए TMC का टिकट मांगा था। उन्होंने इन दावों का सख्ती से खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने कभी राजनीतिक टिकट नहीं मांगा और उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है।

डॉ. बैद्यनाथ ने लीगल नोटिस में क्‍या लिखा?

अधिवक्ता पूजा शुक्ला के जरिए ममता बनर्जी को भेजे गए इस लीगल नोटिस में डॉ. बैद्यनाथ ने बारासात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने या पार्टी टिकट मांगने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने अपनी मां के साथ चल रहे राजनीतिक मतभेदों को उनकी खुद की चुनावी महत्वाकांक्षाओं से जोड़ने वाले पार्टी नेताओं के दावों को पूरी तरह से "झूठा" करार दिया है।

मां के साथ शराब पीने वाले आरोपों पर क्‍या बोले डॉ. बैद्यनाथ

डॉ. बैद्यनाथ ने टीएमसी की पूर्व विधायक सोनाली गुहा के उन व्यक्तिगत आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि वह, उनका भाई और उनकी सांसद मां काकोली घोष दस्तिदार नियमित रूप से शराब पीते हैं। डॉ. बैद्यनाथ ने इन दावों को पूरी तरह आधारहीन, मनगढ़ंत और उनकी प्रतिष्ठा के खिलाफ साजिश बताया है।

कौन हैं डॉ. वैद्यनाथ घोष दस्तीदार?

डॉ. वैद्यनाथ घोष दस्तीदार एक जाने-माने साइकियाट्रिस्ट हैं और सीनियर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता डॉ. काकोली घोष दस्तीदार के बेटे हैं जिन्‍होंने सबसे पहले बगावत करते हुए सांसदी से इस्‍तीफा दे दिया था। डॉ. वैद्यनाथ घोष ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (बोस्टन) और सेंट्रल एंड नॉर्थ वेस्ट लंदन NHS फाउंडेशन ट्रस्ट जैसे प्रतिष्ठित इंस्‍टीट्यूट से ट्रेनिंग ली है और कोलकाता में ही प्रैक्टिस कर रहे हैं।

डॉ. वैद्यनाथ घोष क्‍यों हुए मजबूर?

कानूनी नोटिस में जोर दिया गया है कि डॉ. बैद्यनाथ एक सम्मानित डॉक्‍टर है। नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर उनके खिलाफ की जा रही बयानबाजी से उनकी सामाजिक और प्रोफेशनल प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा है। उन्होंने साफ किया कि बारासात विधानसभा सीट के लिए उन्होंने कभी कोई राजनीतिक इच्छा नहीं जताई।

I-PAC को लेकर किया बड़ा दावा

इस कानूनी नोटिस में डॉ. बैद्यनाथ की ओर से एक महत्वपूर्ण जवाबी दावा भी पेश किया गया है। उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीतियों और अभियानों का प्रबंधन करने वाली कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) और स्थानीय छात्र नेतृत्व से जुड़े प्रतिनिधियों ने पहले कई बार उनसे संपर्क किया था और उन पर चुनावी राजनीति में उतरने का राजनीतिक दबाव बनाया था। नोटिस के अनुसार, आई-पैक और छात्र नेताओं ने उन्हें बारासात सीट से चुनाव लड़ने और पब्लिक हेल्‍थ और जनसंपर्क से जुड़े अभियानों में भाग लेने के लिए लगातार प्रेरित किया था।

डॉ. बैद्यनाथ घोष बोले- मेरा नाम लेना बंद करें

डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने जिन नेताओं को नोटिस भेजी है उन तृणमूल नेताओं से मांग की है कि वे भविष्य में अपनी राजनीतिक चर्चाओं में उनके नाम का इस्तेमाल तुरंत बंद करें। उन्होंने विवादित बयानों को वापस लेने और पंद्रह दिनों के भीतर सार्वजनिक तौर पर सफाई के साथ माफीनामा जारी करने की समयसीमा तय की है ताकि उनकी छवि पर लगे दाग को साफ किया जा सके।

डॉ. वैद्यनाथ घोष की मां काकोली घोष कौन हैं?

डॉ. काकोली घोष दस्तीदार तृणमूल कांग्रेस की एक बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं। वह बारासात लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार सांसद चुनी जा चुकी हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक प्रोफेशनल डॉक्टर रही हैं और उन्होंने पार्टी के शुरुआती दिनों से ही ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। काकोली घोष टीएमसी में रहते हुए महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रहीं हैं।

हाल हालांकि आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड के बाद उनकी कुछ टिप्पणियों ने उन्हें विवादों में ला दिया था इसके बाद से ही इन्‍हें पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया और बाहरी आलोचना का सामना करना पड़ा।

वहीं चुनाव में हार के बाद टीएमसी में ममता बनर्जी से बगावत करने वाली सांसदों में शुमार हो गई। टीएमसी में आंतरिक कलह के बाद बगावत करने वाबे सांसदों की अगुवाई काकोली घोष ही कर रही हैं। कोकोली ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

ममता बनर्जी पर क्‍या लगाए हैं आरोप?

  • काकोली घोष दस्तिदार ने पार्टी के आंतरिक कामकाज और कार्यशैली पर खुलकर असंतोष जताया।
  • पश्चिम बंगाल सरकार में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए।
  • आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज़ को नजरअंदाज कर रहा है।
  • कई अन्य सांसद भी वर्तमान कार्यप्रणाली से नाराज हैं जो जल्‍द बागी गुट में शामिल हो जाएंगे।
  • वहीं काकोली के बेटे द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई से पार्टी के भीतर चल रहा विवाद और गहरा गया
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