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रिपोर्ट में खुलासा: मलबे से बदल रही है गंगा की दिशा, खतरे में है गोमुख का अस्‍तित्‍व

By Ankur Kumar
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    नई दिल्‍ली। नरेंद्र मोदी की सरकार जब से सत्ता में आई गंगा सफाई को लेकर कई परियोजनाएं निकाली गईं। केंद्र सरकार इसे अपनी प्राथमिकता बताती है। लेकिन एक ताजा रिपार्ट ने इन सबपर सवालिया निशान लगा दिया है। जी हां रिपोर्ट में गंगा के प्रदूषण का जो हाल बताया गया है उससे किसी के भी रोंगटे सिहर सकते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषण के कारण गंगा के उद्गम स्थल गोमुख को गंभीर खतरा पहुंच सकता है। समुद्र तल से 13,200 फीट ऊंचाई पर स्थित गोमुख से ही भागीरथी नदी निकलती है। यह चौंकाने वाला तथ्य हाल ही में गंगोत्री से गोमुख तक पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों द्वारा की गई पदयात्रा के दौरान सामने आया। इस दौरान पाया गया कि गोमुख में स्थित ग्लेशियर में न केवल दरारें मिलीं बल्कि यहां झीलनुमा ढांचा भी बन गया है।

    बदल गई है गंगा की दिशा

    बदल गई है गंगा की दिशा

    वैज्ञानिकों ने पाया है कि गोमुख से निकलने वाली नदी की धारा की दिशा बदल रही है। गोमुख एक हिमनद (ग्लेशियर) है और पहले इससे सीधे-सीधे भागीरथी निकलती थीं लेकिन अब इसके बाएं तरफ से निकल रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस परिवर्तन का मुख्‍य कारण झीलनुमा ढांचा है। झीलनुमा ढांचा बनने का मुख्‍य कारण मलबा है।

    नष्‍ट हो सकता है गोमुख

    नष्‍ट हो सकता है गोमुख

    अहमदाबाद स्थित फीजिकल रिसर्च लैब्रोटरी (पीएएल) के वरिष्ठ वैज्ञानिक नवीन जुयाल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस झील के कारण गंगा लगातार बदली हुई दिशा में बह रही हैं और इसका अंतिम परिणाम गोमुख के नष्ट होने के रूप में हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार गोमुख से निकलने वाली एक धारा भारी बारिश के कारण संभवतः अवरुद्ध हो गयी है। वहीं गोमुख में मौजूद भारी कचरे के धारा के प्रवाह में बहने का भी खतरा है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि अगर हिमनद इसी तरह पिघलता रहा और पानी का बहाव जारी रहा तो गोमुख को खत्म हो सकता है। नवीन उन 61 वैज्ञानिकों की टीम में शामिल थे जिन्होंने 11 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक इस इलाके का मुआयना किया था।

    गंगोत्री में नहीं ब्लैक कार्बन

    गंगोत्री में नहीं ब्लैक कार्बन

    गंगोत्री से गोमुख तक पदयात्रा में शामिल एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि दुनिया भर में बढ़ते तापमान के लिए ब्लैक कार्बन को प्रमुख वजह माना जाता है। गोमुख ग्लेशियर में ब्लैक कार्बन का पता लगाने के लिए संस्थान ने भोजवासा और चीड़वासा में दो ऑब्जर बैटरी स्थापित की है। शुरुआती छह माह के नतीजों में गोमुख में ब्लैक कार्बन की मौजूदी मामूली पाई गई। बताया कि ग्लेशियरों का पिघलना एक सामान्य प्राकृतिक क्रिया है।

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    English summary
    The snout of the Gangotri glacier - Gaumukh - from where the Ganga river emerges has been so impacted by debris falling from nearby areas due to landslides that it has altered the course of the river.

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