हेडली ने कहा लश्कर की सुसाइड बॉम्बर थी इश्रत जहां
मुंबई। बुधवार को तकनीकी खराबी की वजह से स्थगित हुई मुंबई हमलों के आरोपी डेविड हेडली की गवाही गुरुवार को फिर से शुरू हो गई। मुंबई कोर्ट में हेडली ने इश्रत जहां पर से भी पर्दा उठाया है। हेडली ने यहां पर बताया है कि इशरत लश्कर-ए-तैयबा की सुसाइड बॉम्बर थी। आपको बता दें वर्ष 2004 में इश्रत की मौत पर देश में खूब हंगामा हुआ था।

इश्रत के बारे में हेडली ने क्या कहा
- लश्कर के पास महिलाओं का एक आत्मघाती दस्ता था।
- इस आत्मघाती दस्ते को अबु मजहर लीड करता था।
- इशरत जहां लश्कर की ही एक ऑपरेटिव थी।
- पहले कहा कि मुंबई हमलों में लश्कर किसी भी सुसाइड बॉम्बर को शामिल नहीं किया गया।
- इसके बाद उसने आगे बताया कि इश्रत को एक ऑपरेश्न में शामिल किया गया था।
- इस ऑपरेशन के तहत इश्रत को नाके पर मौजूद पुलिस वालों की हत्या करनी थी।
- मुजम्मिल बेग ग्रुप का इंचार्ज था और उसके बाद साजिद मीर ने इस ग्रुप को टेकओवर कर लिया था।
- अबु दुजाता ने हेडली का परिचय मुजम्मिल बेग से कराया था।
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आईएसआई से मिली रकम
- भारत आने से पहले उसे आईएसआई के अधिकारी मेजर इकबाल ने 25,000 डॉलर दिए थे।
- साजिद मीर ने 40,000 पाकिस्तानी रुपए तो अब्दुर रहमान पाशा ने 18,000 रुपए दिए थे।
- 14 सितंबर 2006 को मुंबई के तारदेव एसी मार्केट में एक ऑफिस खोला।
- इस ऑफिस का लाइसेंस जुलाई 2008 तक बढ़ाया गया।
- मुंबई में रहने के दौरान तहव्वुर राणा से 11 अक्टूबर 2006 को 66,605 रुपए मिले।
- राणा ने उसे सात नवंबर 2006 को 500 अमेरिकी डॉलर दिए थे।
- उसके बाद फिर उसने 30 नवंबर को 17636 रुपए और चार दिसंबर को 1000 डॉलर लिए।
- उसने सभी पैसे इंडसलैंड बैंक के नरीमन शाखा से लिए थे।
- उसने बताया कि आतंकी हमले से पहले राणा मुंबई आया था।
- उसने राणा को अमेरिका जाने की सलाह दी ताकि वह किसी मुसीबत में न पड़े।
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ऑफिस को बंद करने पर हुई चर्चा
- एक नवंबर 2006 को अपने मकान मालिक बोरा से मुंबई ऑफिस के लिए एग्रीमेंट किया था।
- मेजर इकबाल ने उसे नकली भारतीय करेंसी भी दी थी।
- राणा ने उसके मुंबई ऑफिस के बंद करने के ख्याल को सिरे से खारिज कर दिया था।
- मेजर इकबाल का मानना था कि इस ऑफिस को बंद कर देना चाहिए।
- इस पर जनवरी 2009 को चर्चा की गई थी।
- तारदेव वाला ऑफिस एक इमीग्रेशन आफिसर था।
- इसे आम लोगों के लिए खोला गया था और यह साजिश के कवर के तौर पर था।
- जब हेडली मुंबई में था राणा ने उसके लिए कवर सेटअप किया था।
- वह हर वक्त राणा के संपर्क में रहता था।
- पाक आर्मी में डॉक्टर रहे राणा ने बाद में नौकरी छोड़ दी थी।












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