महाराष्ट्र के नक्सल जिले में आईटीबीपी की तैनाती टली

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले से केन्द्र सरकार सीआरपीएफ की बटालियन को नहीं हटायेगी। पहले उसका इरादा यहां पर आईटीबीपी की बटालियन को तैनात करने का था। आईटीबीपी यानी इंडो -तिब्बत बार्डर पुलिस। सरकार की चाहत थी कि गढ़चिरौली से सीआरपीएफ की बटालियन को हटाकर छतीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भेजा जाए।

प्रभावित जिला

दंतेवाड़ा बेहद नक्सल प्रभावित जिला है छतीसगढ़ का। यहां पर एक तरह से नक्सलियों का राज चलता है। वे जो चाहते हैं, करते हैं। इन्हें वहां पर सिर्फ सीआपपीएफ से ही कड़ी टक्कर मिलती है।

बड़ी चुनौती

दरअसल यूपीए सरकार के दौर में गृह मंत्रालय मानने लगा था कि सीआरपीएफ को ज्यादा चुनौती वाली एसाइनमेंट लेनी चाहिए। गढ़चिरौली में नक्सलियों का असर तो है, पर दंतेवाड़ा जितना भी नहीं है। इसलिए यूपीए सरकार गढ़चिरौली से सीआरपीएफ को हटाने के मूड में थी।

हौंसले बुलंद

सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार की तरह से हाल के दौर में गृह मंत्रालय से आग्रह किया गया कि सीआरपीएफ के हटने से गढ़चिरौली में नक्सलियों के हौंसले बुलंद होने लगेंगे। वे वहां पर अपनी हरकतों को बढ़ा देंगे। इसलिए सीआरपीएफ को नहीं हटाया जाए।

अवसर मिलता

उधर,जानकार कहते हैं कि आईटीबीपी को गढ़चिरौली में तैनात करने से उसे नया काम करने का मौका मिलता। अभी तक तो आईटीबीपी सिर्फ भारतीय-चीन सीमा पर ही नजर रखती है।

सघन अभियान

सूत्रों का कहना है कि अब मोदी सरकार नक्सल प्रभावित जिलों में इन देश विरोधियों के खिलाफ सघन अभियान चलाने लगी है। सरकार का इनका सफाया करने का मन है। सरकार मानती है कि अब नक्सलियों से बातचीत करने का कोई लाभ नहीं है। ये लातों के भूत हैं। इनसे सख्ती से डील किया जाएगा।

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