गलतफहमी के शिकार हुए कौए, घर से निकलते ही एमपी के इस शख्स पर कर देते हैं अटैक

नई दिल्ली- एक शख्स पिछले तीन साल से परेशान है। कौओं की वजह से उसकी जिंदगी हराम हो चुकी है। उसकी स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कुछ लोग अमेरिका के सिएटेल और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च की भी पड़ताल कर चुके हैं, लेकिन उस व्यक्ति को यह समाधान कोई नहीं दे पाया है कि वह कौओं से पीछा कैसे छुड़ाए। उसकी रात तो किसी तरह कट जाती है, लेकिन सुबह के बाद घर से बाहर कदम रखने में भी आफत है। पता नहीं कहां से कौओं का एक बड़ा झुंड सूरज की पहली किरण निकलने के साथ ही उसके घर के बाहर आकर डेरा डाल देता है और फिर वे करते हैं सिर्फ इंतजार कि कैसे शिव केवट बाहर निकलें और वे उनपर अटैक शुरू कर दें।

घर से निकलते ही शुरू हो जाता है अटैक

घर से निकलते ही शुरू हो जाता है अटैक

शिव केवट जब भी घर से बाहर कदम रखते हैं उनका बदन आसमानी आफत की आशंकाओं से सिहर उठता है। क्योंकि, उन्हें पता रहता है कि उनपर आसमानी हमले शुरू होने वाले हैं। लेकिन, क्या करें वह सारा दिन घर में बैठे भी तो नहीं रह सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक घर से बाहर निकलते ही कौए कांव-कांव करते हुए उनपर चारों ओर से हमला करना शुरू कर देते हैं। कभी-कभी एक या दो कौआ उनके सिर या शरीर के दूसरे हिस्सों पर तेजी से चोंच मारते हैं और कभी-कभी पूरा झुंड ही हमलावर हो जाता है। यह सिलसिला पिछले तीन साल से बिना रुकावट के चल रहा है। खुद को कौओं से बचाने के लिए वे अक्सर हाथ में एक छड़ी लेकर चलते हैं, लेकिन कौए फिर भी नहीं मानते।

अकेले की जंग में कई गंभीर जख्म भी मिले हैं

अकेले की जंग में कई गंभीर जख्म भी मिले हैं

शिवपुरी जिले के सुमेला गांव के निवासी शिव केवट के पड़ोसियों के लिए तो ये अब रोज का मनोरंजन बन चुका है और कभी-कभी अपने पड़ोसी के लिए वे परेशान भी हो जाते हैं। उन्हें पता है कि अब शिव घर से बाहर निकलेंगे और कौए जंग छेड़ देंगे। कौए केवट के घर के आसपास वाले घरों के मुंडेरों और छतों पर बैठकर उनका घंटों इंतजार करते रहते हैं। लोग उन्हें भगा भी देते हैं, लेकिन क्या मजाल कि वे बिना शिव को अपना शिकार बनाए मैदान छोड़ कर चले जाएं। इसलिए, ये नजारा आसपास के लोगों की अब आदत में शामिल हो चुका है। लेकिन, इसे अकेले की जंग ने केवट को सिर और शरीर पर कई गहरे जख्म भी दिए हैं।

वे समझते हैं कि मैंने उनके बच्चे को मारा है.......

वे समझते हैं कि मैंने उनके बच्चे को मारा है.......

मजदूरी का काम करने वाले शिव केवट अपनी आपबीती में बताते हैं कि तीन साल से ये कौए उनका पीछा क्यों कर रहे हैं। दरअसल, वे कौओं की गलतफहमी का शिकार हो रहे हैं। हुआ ये था कि तीन साल पहले कौए का एक बच्चा लोहे की एक जाली में फंस गया था। केवट ने उसकी जान बचाने के लिए उसे जाल से निकालने की कोशिश की थी, लेकिन वह इतना जख्मी हो चुका था कि उसने उनके हाथों में ही दम तोड़ दिया। तब से कौए इन्हें उस बच्चे की मौत का गुनाहगार मान रहे हैं। केवट निराश होकर बोलते हैं कि, "वह मेरे हाथों में मर गया। अगर मैं उन्हें पूरी बात बता पाता कि मैं तो सिर्फ उसकी मदद करने की कोशिश कर रहा था......।" अपने हाथ में छड़ी लेकर निकलने के बारे में वे बताते हैं कि, "मैं इसे सिर्फ उनकी ओर लहराता हूं........ वे समझते हैं कि मैंने उनके बच्चे को मार दिया है।"

शिव को कैसे पहचान लेते हैं कौए?

शिव को कैसे पहचान लेते हैं कौए?

तीन साल से यह व्यक्ति यह सोच-सोच कर परेशान है कि आखिर ये कौए उन्हें पहचान कैसे लेते हैं। क्या कौओं में इंसान का चेहरा याद रखने की क्षमता है? दरअसल, वे सही सोच रहे हैं। अमेरिका के दो-दो यूनिवर्सिटी में कौओं की पहचान क्षमता पर रिसर्च की जा चुकी है। सिएटेल और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की रिर्सच में ये बात सामने आई है कि कौओं की याददाश्त क्षमता बहुत ही ज्यादा होती है और जो भी इंसान उसे चोट पहुंचाते हैं, उन्हें वे लंबे वक्त तक याद रखते हैं।

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