Farmer Protest : एमएसपी मांग रहे किसानों में आक्रोश, पंजाब में रेल रोको, तीन अगस्त को फिर आंदोलन
फसलों की एमएसपी की मांग कर रहे किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अमृतसर में आज रेल रोको आंदोलन हुआ। आने वाले दिनों में भी आंदोलन तेज करने की योजना है। crop msp skm protest rail roko in punjab
अमृतसर (पंजाब), 31 जुलाई : फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के उचित कार्यान्वयन की मांग करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) देशव्यापी विरोध कर रहा है। SKM के नेतृत्व में पंजाब भर के किसानों ने देशव्यापी विरोध के आह्वान का समर्थन किया। रविवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चार घंटे का 'रेल रोको' विरोध प्रदर्शन हुआ। बता दें कि एसकेएम में लगभग 40 कृषि संगठन शामिल हैं।

किसानों ने MSP की मांगें पूरी नहीं होने पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसानों ने अमृतसर, बठिंडा के वल्लाह में रेलवे ट्रैक अवरुद्ध कर दिया। अंबाला, पंचकूला के बरवाला और कैथल के चीका में शंभू टोल प्लाजा पर भी विरोध प्रदर्शन किया। एएनआई की रिपोर्ट में अमृतसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान गुरलाल सिंह ने बताया, जब दिल्ली में किसान आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन किया था, तो केंद्र ने हमें हमारी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक किसी ने इसे पूरा नहीं किया है। हम फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
किसानों के रेल रोको आंदोलन के कारण कई रेल यात्री अमृतसर में रेलवे स्टेशन पर फंस गए। बता दें कि 11 जुलाई को लुधियाना में भारती किसान यूनियन (लखोवाल) ने विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया था। एसकेएम ने आगामी 3 अगस्त को आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ गन्ने के बकाया का भुगतान न करने और सफेद मक्खी से क्षतिग्रस्त कपास की फसल के मुआवजे सहित कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करने की भी घोषणा की है।
एसकेएम के सदस्य और भारती किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि तीन अगस्त के दिन किसान राज्य के माझा, मालवा और दोआबा क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करेंगे। दलेवाल ने केंद्र द्वारा गठित न्यूनतम समर्थन मूल्य समिति को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान निकाय 22 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर भी एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन करेंगे।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नवंबर में, तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। उनकी घोषणा के बाद- किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम वापस लिया था।
बता दें कि किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम में एक ऐसा तंत्र बनाने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें किसान कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) के बाहर भी अपने खेत की उपज बेच सकते हैं। कानून के तहत कहा गया है कि कोई भी लाइसेंसधारक व्यापारी किसानों से परस्पर सहमत कीमतों पर उपज खरीद सकता है। कृषि उत्पादों का यह व्यापार राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए मंडी कर से मुक्त होगा।
किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम के तहत कॉन्ट्रैक्ट फार्मर्स को अनुबंध खेती करने और अपनी उपज की स्वतंत्र मार्केटिंग की अनुमति मिलती है। आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम के तहत मौजूदा आवश्यक वस्तु अधिनियम में एक संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इस कानून के तहत असाधारण स्थितियों (अब संकट) को छोड़कर खाद्यान्न, दाल, खाद्य तेल और प्याज जैसी वस्तुओं का व्यापार मुक्त रहेगा।












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