डेल्टा वेरिएंट पर प्रभावी है कोविशील्ड, लैंसेट के अध्ययन में सामने आई बात

नई दिल्ली, 30 नवंबर: इस साल की शुरुआत में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने जमकर तबाही मचाई थी। वैसे तो हालात अब सुधर गए हैं, लेकिन डेल्टा वेरिएंट पर वैक्सीन के प्रभाव पर रिसर्च अभी जारी है। हाल ही में लैंसेट के एक अध्ययन से पता चला कि डेल्टा वेरिएंट पर कोविशील्ड वैक्सीन पूरी तरह से प्रभावी रही। इसमें दोनों डोज लेने वाले लोगों में वैक्सीन की प्रभावकारिता 63 प्रतिशत थी, जबकि ये मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ 81 प्रतिशत प्रभावी रही।

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इस अध्ययन को ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) ने किया, जिसमें अप्रैल और मई 2021 के बीच SARS-CoV-2 संक्रमण में कोविशील्ड के प्रभाव का अध्ययन हुआ। इसमें पता चला कि 'ChAdOx1 nCoV-19' वैक्सीन मध्यम से गंभीर कोविड मरीज में प्रभावी रहा। वैक्सीन के सुरक्षातंत्र को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने वेरिएंट के खिलाफ गतिविधि और सेलुलर प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं का आंकलन किया। जिसमें पता चला कि स्पाइक-विशिष्ट टी-सेल प्रतिक्रियाओं को डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ संरक्षित किया गया था।

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    इस अध्ययन में 2379 कंफर्म केस थे, जिसमें 1981 कंट्रोल में रहे। अध्ययन में पता चला कि सेलुलर प्रतिरक्षा सुरक्षा वायरस के रूपों के खिलाफ कमजोर प्रतिरक्षा के लिए क्षतिपूर्ति कर सकती है। जिस वजह से मध्यम से गंभीर बीमारी वाले मरीज अस्पताल की बजाए घर पर ही ठीक हो जाते हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ये अध्ययन वास्तविक दुनिया के टीके की प्रभावशीलता और टीकाकरण के प्रति प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया पर व्यापक डेटा प्रदान करता है, जिससे पॉलिसी बनाने में मदद मिलती है।

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