कोविशील्ड डोज का अंतर बढ़ाने की वजह, कितना सुरक्षित और उनका क्या जो ले चुके दोनों डोज? विस्तार से जानिए

नई दिल्ली, 15 मई। केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के खिलाफ दी जी रही कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज के बीच का अंतर बढ़ा दिया है। अब पहली वैक्सीन लेने के बाद दूसरी डोज लेने के लिए समय को बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह कर दिया गया है। पहले कोविशील्ड की दो डोज के बीच का यह अंतर 4 से 6 सप्ताह का रखा गया था। वैक्सीन से जुड़े लोगों का कहना है कि दो डोज में अंतर बढ़ाने से लोगों में वैक्सीन का बेहतर रिस्पॉन्स तो होगा ही इसके साथ ही दूसरी लहर से जूझ रहे देश में अधिक मात्रा में टीके तक पहुंच होगी। लेकिन इसके साथ ही ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या दो डोज में अंतर का ज्यादा बढ़ाने के इसके असर में कमी नहीं होगी? साथ ही क्या उन लोगों के लिए चिंता की बात है जिन्होंने 6 सप्ताह में अपनी दूसरी डोज ले ली है।

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    वैक्सीन कैसे करती है काम?

    वैक्सीन कैसे करती है काम?

    ये बात समझने से पहले हमें वैक्सीन को समझना होगा। अभी तक जो भी कोरोना वायरस के लिए जो भी वैक्सीन बनी हैं उसमें जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को हटा दिया जाए तो सभी टीकों को दो डोज में लिया जाना है। वैक्सीन सही तरीके से काम करे इसके लिए जरूरी है कि दोनों डोज को सही तरीके से बताए गए अंतर पर दिया जाए।

    वैक्सीन की पहली डोज जहां शरीर में एंटीबॉडी तैयार करती है वहीं दूसरी डोज शरीर की प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत करती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भले ही कोई पहले शॉट के बाद संक्रमित हो जाए फिर भी उसे उसे दूसरी डोज लेनी चाहिए। दोनों डोज लगने के बाद ही कोई व्यक्ति पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है।

    दोनों डोज में अंतर बढ़ाने की वजह

    दोनों डोज में अंतर बढ़ाने की वजह

    विशेषज्ञों ने वैक्सीन की डोज के अंतर बढ़ाने का फैसला कई केस स्टडी और क्लीनिकल डेटा के अध्यन के बाद किया गया है। जिसमें पहली डोज के कई सप्ताह के बाद दूसरी डोज लेने पर प्रतिरक्षा के स्तर में वृद्धि देखी गई थी।

    कोविशील्ड को लेकर जो प्रारंभिक सलाह दी गई थी उसमें वैक्सीन की दो डोज के बीच 4-6 सप्ताह का अंतर रखने को कहा गया था (बाद में इसे 4-8 सप्ताह तक बढ़ाया गया)। क्लीनिकल ट्रायल में यह साफ हुआ है कि 8 सप्ताह बाद दूसरे डोज लेने पर टीका वर्तमान के 80-90% के मुकाबले ज्यादा सुरक्षा देने में सक्षम था।

    अंतर में देरी एंटीबॉडी रिस्पॉन्स बढ़ाने में सक्षम
    ऐसा नहीं है कि दो डोज में अंतर को मंजूरी देने वाला भारत पहला देश है। स्पेन में क्लीनिकल स्टडीज में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद इन सिफारिशों का पालन किया जा रहा है।

    डॉक्टरों का कहना है दो डोज में लंबा अंतर एक मजबूत प्रतिक्रिया देता है। यह भी कहा गया है कि अगर डोज को हफ्तों के बाद दिया जाता है तो यह कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को दो गुना तक तक अधिक बढ़ा सकता है।

    दोनों डोज ले चुके लोगों को चिंता करने की जरूरत?

    दोनों डोज ले चुके लोगों को चिंता करने की जरूरत?

    बहुत सारे लोग, जिनमें वरिष्ठ नागरिकों और स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं अब तक कोविशील्ड की दोनों डोज ले चुके हैं। ऐसे लोगों को केंद्र का फैसला चिंता पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
    विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों को पहले ही अपनी दो टीकों की डोज लग चुकी है उन्हें नए दिशानिर्देशों से डरने की जरूरत नहीं है। यह पहली बार नहीं है जब कोविशील्ड के अंतर को बढ़ाया गया है। शुरुआत में यह 4 से 6 सप्ताह थी जिसे 4 से 8 सप्ताह में बदला गया था।

    वैक्सीन के बारे में ये बात आपको जाननी चाहिए

    वैक्सीन के बारे में ये बात आपको जाननी चाहिए

    यहां ये बात समझनी बेहद जरूरी है कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने से वायरस के खिलाफ अच्छी प्रतिरक्षा मिलती है और यह बीमारी की गंभीरता और मृत्यु दर के जोखिम को कम करता है। हालांकि जिन लोगों को दोनों टीका लगाया जाता है, वे भी संक्रमित हो सकते हैं लेकिन वैक्सीन इसे नियंत्रित करती है।

    12-16 सप्ताह का अंतर करने पर पहले की तुलना में एक उच्च एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदर्शित कर सकती है। इसके साथ ही देश में जिस तरह से टीकाकरण की जरूरत ज्यादा है यह फैसाल अधिक लोगों को टीकाकरण की पहुंच में ला सकता है। ये बात याद रखना जरूरी है टीका दोनों स्थितियों में समान रूप से प्रभावी है।

    पहली डोज के बाद कितने सुरक्षित हैं आप?

    पहली डोज के बाद कितने सुरक्षित हैं आप?

    वैक्सीन आपके शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र को तैयार करती है। जब निष्क्रिय/डेड-वायरस सिस्टम के साथ संपर्क करता है तो वैक्सीन का पहला शॉट पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को एक्टिव करने का काम करता है। एंटीबॉडीज उत्पन्न होती हैं और शरीर संक्रमण पैटर्न को पहचानना सीखता है और आपकी रक्षा करता है। यह प्रक्रिया शॉट लेने के कुछ घंटों या बाद के दिनों के बाद शुरू होती है। लेकिन इससे व्यक्ति को 'आंशिक सुरक्षा मिलती है, न कि पूर्ण प्रभावकारिता।

    दूसरी डोज प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने में मदद करती है और संक्रामक रोगों को बेहतर ढंग से याद रखने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली में कोशिकाओं को शक्ति प्रदान करती है।

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