कोविड-19 वैक्सीन स्टेटस: भारत सहित दुनिया के बाकी देश दवा के कितना करीब पहुंचे

नई दिल्ली। दुनिया के कई देश अब भी कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट का सामना कर रहे हैं। वायरस के खातमे के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है। आमतौर पर वैक्सीन बनाने में कई साल लग जाते हैं लेकिन ये वायरस इतना घातक है कि हर देश जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटा है। ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रा जेनेका द्वारा बनाई गई वैक्सीन अपने आखिरी चरण के परीक्षण में है। इसमें 8000 वॉलंटीयर शामिल हैं, जिसके बाद से इस वैक्सीन के जल्द बाजार में उतरने की उम्मीद है।

भारत में भी बन रही वैक्सीन

भारत में भी बन रही वैक्सीन

भारत में भी वैक्सीन बनाने पर तेजी से काम हो रहा है। यहां भारत बायोटेक की वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को मानव परीक्षण की मंजूरी मिल गई है। जर्मन बायोटेक फर्म BioNTech और Pfizer और इनोवो फार्मास्यूटिकल को भी अपनी वैक्सीन से संतोषजनक परिणाम मिल रहे हैं। दुनियाभर में अभी करीब 140 वैक्सीन का अलग-अलग चरण में ट्रायल चल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, करीब 16 वैक्सीन अपने आखिरी चरण- क्लीनिकल ट्रायल में हैं। इनमें से पांच चीन की हैं। जबकि तीन अमेरिका, दो ब्रिटेन, एक-एक ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और रूस की हैं।

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    इम्यून सिस्टम के लिए सुरक्षित ऑक्सफॉर्ड की वैक्सीन

    इम्यून सिस्टम के लिए सुरक्षित ऑक्सफॉर्ड की वैक्सीन

    ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीन बनाने पर काम करने वाले एक वैज्ञानिक ने कहा कि ये वैक्सीन कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए भी सुरक्षित है। AZD1222 की वैक्सीन को ब्राजील में पहले क्लीनिकल ट्रायल में 5 हजार वॉलंटीयर पर टेस्ट किया जा चुका है। अब ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका में इसका ट्रायल जारी है। अमेरिका की कंपनी इनोवियो फार्मास्यूटिकल ने कहा है कि प्रारंभिक क्लीनिकल ट्रायल्स में उसकी वैक्सीन से अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं।

    इन कंपनियों को भी मिल रही सफलता

    इन कंपनियों को भी मिल रही सफलता

    कंपनी की INO-4800 डीएनए वैक्सीन का पहला चरण खत्म हो चुका है और अब इसके दूसरे और तीसरे चरण पर काम हो रहा है। इनोवियो ने पहला ट्रायल 400 स्वस्थ लोगों पर किया है। जिनकी उम्र 18 से 50 साल के बीच है। अब कंपनी की योजना 2020 के अंत तक एक मिलियन डोज तैयार करने की है। BioNTech और अमेरिकी कंपनी Pfizer भी प्रारंभिक मानव चरण में सुरक्षित पाई गई हैं। BioNTech ने अपनी BNT162b1 दवा का परीक्षण 24 स्वस्थ लोगों पर किया था। जिसमें पता चला कि 28 दिन के बाद इन लोगों में कोविड-19 के खिलाफ उच्च एंटी बॉडी बनी है।

    अमेरिका और यूरोप में होगा ट्रायल

    अमेरिका और यूरोप में होगा ट्रायल

    रायटर ने BioNTech के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर उगूर साहिन के हवाले से कहा, 'वैक्सीन के पहले ट्रायल के परिणाम से पता चलता है कि ये वैक्सीन इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है।' अब अगले स्टेज में वैक्सीन का ट्रायल 30 हजार लोगों पर होगा। ये ट्रायल जुलाई के आखिर में अमेरिका और यूरोप में होगा। BioNTech-Pfizer मिलकर 2020 तक 100 मिलियन डोज तैयार करने पर काम कर रही हैं। चीन में कैनसिनो बायोटेक्स (CanSino Biologics) की वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में सुरक्षित पाई गई थी। जिसके बाद इसके मिलिटरी ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। Ad5-nCoV वैक्सीन जो चीन की आठ में से एक वैक्सीन है, उसे कनाडा में मानव परीक्षण की अनुमित मिल गई है।

    भारत बायोटेक की वैक्सीन भी सफलता के करीब

    भारत बायोटेक की वैक्सीन भी सफलता के करीब

    भारत बायोटेक आईसीएमआर और एनआईवी के साथ मिलकर जिस वैक्सीन को बना रहा है, उसे जुलाई में मानव परीक्षण की अनुमति मिल गई है। इस कंपनी ने प्री-क्लिनिकल अध्ययन के रिजल्ट जमा किए थे, जिसके बाद इसे मंजूरी मिल गई। BBIL का कहना है, 'हम अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते कि वैक्सीन मानव परीक्षण के दौरान कैसा काम करेगी। फेस 1 और 2 में मिली सफलता के आधार पर हम क्लीनिकल ट्रायल्स कर सकते हैं।' वहीं अन्य भारतीय कंपनियां भी कोविड-19 की वैक्सीन बनाने पर काम कर रही हैं। इनमें जायडस कैडिला, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का नाम शामिल है।

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