चीन में कोरोना के खिलाफ रणनीति बनाने वाले अहम विशेषज्ञ का दावा, भारत में अमेरिका की तरह संक्रमण चरम पर पहुंच सकता है

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते भारत में तकरीबन 680 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 21 हजार से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जाए। संक्रमण को रोकने के लिए 3 मई तक के लिए देश में लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। लेकिन बावजूद इसके संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच चीन के शीर्ष संक्रमण एक्सपर्ट की मानें तो आने वाले हालात और भी मुश्किल हो सकते हैं और भारत में संक्रमण की दर काफी बढ़ सकती है।

संक्रमण चरम पर पहुंच सकता है

संक्रमण चरम पर पहुंच सकता है

चीन में कोविड-19 के खिलाफ रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले डॉक्टर झैंग वेहॉन्ग जोकि चीन के संघाई स्थित ह्यूसन हॉस्पिटल के संक्रामक रोग विभाग के डायरेक्टर हैं, उनका कहना है कि भारत में कोविड-19 का प्रसार अमेरिका की ही तर्ज पर हो रहा है और जल्द ही यहां भी यह चरम पर पहुंच सकता है। वेहॉन्ग ने कहा कि भारत में समुदाय संक्रमण के कुछ संकेत पहले से रही हैं, लिहाजा भारत भी अमेरिका की राह पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भारत की समग्र स्थित अमेरिका के जैसी ही है। अमेरिका में अलग-अलग राज्यों ने जो कदम उठाए वो अलग-अलग थे। कुछ राज्य काफी सख्त थे और कुछ राज्यों ने काम करना शुरू कर दिया। भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को भी ध्यान में रखना है, साथ ही संक्रमण को भी रोकना है ताकि उसे इस महामारी को रोकने की बहुत अधिक कीमत ना चुकानी पड़े।

भारत की रणनीति अलग

भारत की रणनीति अलग

वेहॉन्ग ने कहा कि भारत दीर्घकालिक रणनीति बनाई है जोकि एक लिहाज से ठीक भी है, उसने टेस्टिंग को भी बढ़ाया है। हालांकि भारत चीन की तुलना में इस वायरस को रोकने के लिए बिल्कुल अलग रणनीति बना रहा है। चीन में पूरी तरह से लॉकडाउन किया, बड़ी संख्या में लोगों को क्वारेंटीन किया। लेकिन भारत के राष्ट्रीय हालात को देखते हुए उसकी स्थिति को समझा जा सकता है। हर देश को अपने लिहाज से रणनीति बनानी चाहिए, जो उन्हें बेहतर लगे। ऑस्ट्रेलिया ने 100 फीसदी लॉकडाउन किया है, जबतक कि संक्रमण कम ना हो जाए, लेकिन हर देश के लिए एक ही रणनीति नहीं हो सकती है।

भारत अमेरिका की ही रणनीति पर आगे बढ़ेगा

भारत अमेरिका की ही रणनीति पर आगे बढ़ेगा

मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि भारत को इस रणनीति का पालन नहीं करना चाहिए। हमे लगता है कि भारत अमेरिका की ही रणनीति पर आगे बढ़ेगा। संभव है कि भारत चीन की तरह संक्रमण के मामले कम रख पाए। चीन ने इस संक्रमण को हूबे प्रांत में ही सीमित कर दिया, पूरे प्रांत को लॉकडाउन किया गया, लोगों को क्वारेंटीन किया गया और उनका टेस्ट किया गया। लेकिन साथ ही यह ध्यान रखने वाली बात है कि संक्रमण के मामले बढ़ने का यह कतई मतलब नहीं है कि इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। सिर्फ संक्रमण के मामलों को मत देखिए, अमेरिका में हजारों मामले हैं, यूरोप में भारत से भी ज्यादा मामले हैं। लेकिन फिर भी यूरो के लोगों की जिंदगी थमी नहीं है, वहां भी फिर से लोग काम पर जाना शुरू कर रहे हैं, स्कूल, बिजनेस खुल रहा है।

SARS से अलग है

SARS से अलग है

डॉक्टर झैंग ने बताया कि वैश्विक महामारी अब काफी हद तक नियंत्रित है, संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है और मृत्यु दर आगे कम होगी। उन्होंने कहा कि यह संक्रमण 2003 के SARSसे अलग है, इसकी मृत्यु दर काफी ज्यादा थी, यह युवा और उम्रदराज दोनों में ज्यादा थी। यही वजह है कि कई देश फिर से स्कूल और अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।

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