भारत में कोरोना केस 4500 के करीब-मौतें 40 पार, इन 8 राज्यों में नए वेरिएंट का प्रकोप! 24 घंटे में कितनी डेथ?

COVID 19 Cases in India: भारत में एक बार फिर कोरोना की आहट सुनाई दे रही है। मई के आखिरी हफ्ते में COVID-19 केसों में आई तेजी ने हेल्थ एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। देश में एक्टिव केस 4302 हो चुके हैं और अब तक 44 मौतें दर्ज की गई हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र, केरल और गुजरात जैसे राज्यों में देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 276 नए केस सामने आए हैं और 7 लोगों की जान चली गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मौतों में 4 लोगों की जान सिर्फ महाराष्ट्र में गई। दिल्ली, गुजरात और तमिलनाडु में भी एक-एक मौत दर्ज की गई है।

COVID 19 Cases in India

नए वेरिएंट की दस्तक, 8 राज्य हाई रिस्क पर

ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल की मानें ने बताया है कि भारत में चार नए वैरिएंट (LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1) की पुष्टि हुई है। ये वेरिएंट फिलहाल दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सक्रिय हैं। अकेले इन आठ राज्यों में 200 से ज्यादा एक्टिव केस हैं, जिससे इन राज्यों को 'हाई रिस्क जोन' माना जा रहा है।

राज्यवार स्थिति क्या कहती है?

केरल में सबसे ज्यादा 1373 एक्टिव केस हैं और अब तक 9 मौतें हो चुकी हैं। वहीं, महाराष्ट्र में 510 केस और 14 मौतें, गुजरात में 461 केस, और दिल्ली में 457 केस सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और बंगाल में भी संक्रमण बढ़ रहा है।

क्या बोले अस्पताल और कोर्ट?

दिल्ली के आरएमएल और सफदरजंग जैसे अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार किए जा चुके हैं। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कोविड की अगली लहर अभी खत्म नहीं हुई है और सारे प्रोटोकॉल लागू किए जाएं।

क्या सावधानी जरूरी है?

डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक जितने भी मरीज सामने आए हैं, उनमें सभी में सामान्य लक्षण ही देखे गए हैं। लेकिन वायरस की ट्रांसमिशन रफ्तार को देखते हुए लोगों से भीड़भाड़ से बचने, मास्क पहनने और सैनिटाइजेशन बनाए रखने की सलाह दी गई है।

नया वेरिएंट कितना खतरनाक है?

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, NB.1.8.1 को 'वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' में रखा गया है और अब तक यह ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण नहीं बना है। लेकिन इसकी संक्रमण दर तेज है, और यही चिंता की बात है।

क्या आने वाली है नई लहर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केस इसी गति से बढ़ते रहे, तो जून के दूसरे हफ्ते में एक मिनी-लहर की स्थिति बन सकती है। ऐसे में, टेस्टिंग और ट्रेसिंग को फिर से एक्टिव करना होगा। फिलहाल, घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। सरकार और हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं, और लोगों से अपील है कि कोविड गाइडलाइंस को गंभीरता से लें।

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