'हम बांग्लादेशी नहीं...', घुसपैठिए होने की शक में कपल को बेंगलुरु जेल में किया गया बंद, 301 दिन बाद हुए रिहा

बेंगलुरु पुलिस ने जुलाई 2022 में बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदेह में पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के एक दंपति और उसके 2 साल के बेटे को गिरफ्तार किया था। अब जाकर वह रिहा हुए हैं।

Bangladeshi infiltrators

पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के एक दंपति को बेंगलुरु जेल में 301 दिनों तक बांग्लादेशी होने के शक में बंद रहना पड़ा। अब जाकर मई 2023 के आखिर दिनों में दंपति को रिहा किया गया है। बर्धमान जिले के प्रवासी दंपति और उनके दो साल के बेटे को बेंगलुरु की जेल में पिछले साल जुलाई 2022 में बंद कर किया गया था। प्रशासन को शक था कि ये बांग्लादेशी हैं।

बर्धमान दंपति पलाश अधिकारी और शुक्ला अधिकारी को बांग्लादेशी घुसपैठिए होने के संदेह में बेंगलुरु पुलिस ने जुलाई 2022 को हिरासत में लिया था। पलाश के परिवार ने अपने बेटे और बहू के पश्चिम बंगाल में स्थायी निवास की वैधता साबित करने वाले दस्तावेज पेश किए थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रिहा नहीं किया था।

पलाश अधिकारी और शुक्ला अधिकारी के जेल में 301 दिन बिताने के बाद एक अदालत द्वारा उन्हें जमानत दी गई है। बेंगलुरु से घर जाने के लिए ये कपल 1 जून 2023 को हावड़ा जाने वाली दुरंतो एक्सप्रेस में सवार हुए थे और 2 जून को अपने घर पहुंचे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पलाश और शुक्ला मजदूरी और काम की तलाश में बेंगलुरु गए थे। दोनों का संघर्ष जुलाई 2022 में शुरू हुआ। वे अपने दो साल के बच्चे के साथ बेंगलुरु में थे, जब उन्हें पुलिस द्वारा बांग्लादेशी होने के शक में गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

दंपति ने पुलिस को यह समझाने की कोशिश की कि वे पूर्वी बर्धमान के जमालपुर थाना क्षेत्र के झाउग्राम के तेलपुकुर के रहने वाले हैं, लेकिन पुलिस पर इसका कोई असर नहीं हुआ। बाद में बेंगलुरु पुलिस की एक टीम ने पूर्वी बर्धमान में पलाश के घर की जांच की। टीम ने स्थानीय जमालपुर बीडीओ से भी मुलाकात की और दस्तावेजों की जांच की।

पलाश के रिश्तेदार भी बेंगलुरु पहुंचे और अपनी जमानत याचिका दायर करने के लिए वकीलों को हायर किया। पुलिस ने इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

पलाश के रिश्तेदार सुजॉय हलदर ने कहा कि दंपति को 28 अप्रैल 2023 को जमानत दी गई थी लेकिन उन्हें 24 मई 2023 को जेल से रिहा किया गया क्योंकि वे तुरंत जमानत बांड का पालन नहीं कर सके। इसके लिए स्थानीय गारंटर को अपने जमीन के कागजात जमा करने को कहा गया था।

ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली पलाश की बहन साथी अधिकारी ने केस लड़ने के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी। साथी अधिकारी ने कहा, "मुझे 24 मई की रात 9.30 बजे फोन आया कि दादा (बड़े भाई) और बौदी (भाभी) को जेल से रिहा कर दिया गया है। मैंने उनसे वीडियो कॉल पर बात की। वीडियो कॉल के दौरान, मेरी मां रोने लगी थी। किसी तरह हमने अपने आंसुओं पर कंट्रोल किया। दोनों कमजोर लग रहे थे। उसने अपने दो साल के भतीजे से भी बात की।"

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