Pranab Mukherjee ने कसाब की फांसी पर लगाई थी मुहर, इन बड़े फैसलों को याद करेगा देश

नई दिल्ली। देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आज (31 अगस्त) दिल्ली के एक आर्मी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 84 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति को ब्रेन सर्जरी के लिए दिल्ली कैंट के आर्मी अस्पताल (R&R) में भर्ती कराया गया था जहां उनके कोरोना संक्रमित होने की जानकारी मिली थी। ब्रेन सर्जरी के बाद प्रणब मुखर्जी कभी रिकवर नहीं कर पाए और कोमा में चले गए। एक दिन पहले डॉक्टरों ने उनके फेफड़ों में संक्रमण की वजह से सेप्टिक शॉक की स्थिति पैदा होने की जानकारी दी थी। देश के 13वें राष्ट्रपति के निधन से पूरा देश सदमे में है, लोग अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

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    Pranab Mukherjee Passed Away: Kasab की फांसी समेत इन फैसलों के लिए याद रखेगा देश | वनइंडिया हिंदी
    इन फैसलों के लिए याद करेगा देश

    इन फैसलों के लिए याद करेगा देश

    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को देश उनके सरल स्वभाव और बिना विलंब किए फैसला लेने के लिए याद करेगा। पूरा देश उन्हें प्यार से प्रणब दा कहकर बुलाता था। आज में पूर्व राष्ट्रपति के उन तीन बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने देश को एक नई दिशा दिखाई। बता दें कि प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद पर रहते हुए कई बड़े फैसले किए थे जिनके लिए देश उनको हमेशा याद करेगा।

    अफजल, कसाब और याकूब की फांसी लगाई थी मुहर

    अफजल, कसाब और याकूब की फांसी लगाई थी मुहर

    प्रणब मुखर्जी ने बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के दौरान तीन बड़े आतंकवादियों की फांसी पर मुहर लगाई थी। उन्होंने दया याचिकाओं के खिलाफ कभी नरम रूख नहीं अपनाया और अपने कार्यकाल के दौरान 97 फीसदी दया याचिकाएं खारिज की। बता दें कि अजमल कसाब मुंबई हमले के दौरान जिंदा पकड़ा गया एक मात्र पाकिस्तानी आतंकवादी था जिसकी फांसी पर प्रणब मुखर्जी ने मुहर लगाई। इसके अलावा उन्होंने संसद पर हमले का दोषी कश्मीरी आतंकवादी अफजल गुरु और 1993 के बंबई बम धमाकों का दोषी याकूब मेमन की दया याचिका खारिज कर उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचाया।

    रेप मामलों में क्षमा देने से इनकार

    रेप मामलों में क्षमा देने से इनकार

    प्रणब मुखर्जी ऐसे पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने रेप मामले के दोषियों को क्षमा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान करीब 37 दया याचिकाओं पर विचार किया जिसमें से उन्होंने ज्यादातर में कोर्ट के फैसले को बरकार रखा। अपने कार्यकाल की समाप्ति के दौरान उन्होंने रेप के दोषियों को क्षमा देने से मना कर दिया। जानकारी के मुताबिक एक मामला इंदौर का था और दूसरा पुणे का था।

    चार लोगों को दिया जीवनदान

    चार लोगों को दिया जीवनदान

    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान सिर्फ 4 दोषियों को ही फांसी के फंदे से बचाकर उन्हें जीवनदान दिया। प्रणब दा के उन फैसलों को आज भी साहसी फैसलों में गिना जाता है। इनमें से एक मामला साल 1992 का था जिसमें दोषी ने अगड़ी जाति के 34 लोगों की हत्या कर दिया था। राष्टपति पद पर रहते हुए उन्होंने 2017 नववर्ष पर कृष्णा मोची, नन्हे लाल मोची, वीर कुंवर पासवान और धर्मेंद्र सिंह उर्फ धारू की फांसी की सजा को आजीवन कारावास की सजा में बदल दिया।

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