भारत की पहली mRNA-आधारित कोविड वैक्सीन पाई गई सुरक्षित, 2-3 चरण के लिए मिली मंजूरी
नई दिल्ली, अगस्त 24: केंद्र ने मंगलवार को सूचित किया कि देश की पहली एमआरएनए-आधारित कोविड वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। अब इसे दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षणों के लिए आगे बढ़ाया गया है। इस वैक्सीन को बनाने वाली पुणे स्थित बायो टेक्नोलॉजी कंपनी जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड को फेज 2 और 3 के क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स देश की पहली एमआरएनए-आधारित कोविड वैक्सीन पर काम कर रही है।

जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने सरकार के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को चरण- I के अध्ययन के अंतरिम क्लिनिकल डेटा प्रस्तुत किए हैं। कमेटी ने वैक्सीन के पहले चरण के अंतरिम नतीजों के एक डेटा की समीक्षा की और पाया कि वैक्सीन HGCO19 सुरक्षित और इम्युनोजेनिक है। जिसके बाद दूसरे और तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दी गई है।
HGCO19 एमआरएनए बेस्ड कोविड19 वैक्सीन का दूसरे चरण का ट्रायल लगभग 10-15 जगहों पर किया जाएगा। जबकि तीसरे चरण में ये ट्रायल 22-27 जगहों पर किया जाएगा। जेनोवा ने इस अध्ययन के लिए डीबीटी-आईसीएमआर क्लीनिकल ट्रायल नेटवर्क साइटों का उपयोग करने की योजना बनाई है। जेनोवा के एमआरएनए बेस्ड कोविड19 वैक्सीन विकास कार्यक्रम को आंशिक रूप से डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी सीईपीआई के तहत पार्टली फंड किया गया था।
डीबीटी ने मिशन कोविड सुरक्षा- भारतीय कोविड-19 वैक्सीन विकास मिशन के तहत कार्यक्रम का समर्थन किया, जिसे बीआईआरएसी द्वारा लागू किया गया था। वैक्सीन को दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति मिलने पर डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी सचिव डॉ रेणु स्वरूप ने कहा, "ये बहुत गर्व की बात है कि देश का पहला एमआरएनए-आधारित टीका सुरक्षित पाया गया है और भारत के डीसीजीआई ने दूसरे और तीसरे चरण को मंजूरी दी है। हमें विश्वास है कि ये भारत और दुनिया दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण टीका होगा। ये हमारे स्वदेशी वैक्सीन विकास मिशन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भारत को वैक्सीन विकास के वैश्विक मानचित्र पर स्थान देता है।
जेनोवा के सीईओ डॉ संजय सिंह ने कहा कि, पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में हमारे mRNA- आधारित कोविड-19 वैक्सीन उम्मीदवार HGCO19 की सुरक्षा स्थापित करने के बाद, जेनोवा का ध्यान चरण II / III निर्णायक नैदानिक परीक्षण शुरू करना है। समानांतर में, जेनोवा देश की वैक्सीन आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपनी विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने में निवेश कर रही है।












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