अगस्त-सितंबर तक आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर: एम्स डायरेक्टर
नई दिल्ली, 23 जुलाई। कोरोना महामारी की तीसरी लहर का खतरा लगातार देश पर मंडरा रहा है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि एक बार फिर से कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। जिस तरह से कुछ महीने पहले कोरोना की दूसरी लहर आई थी, उसमे बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। इस बीच एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने लोगों से मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और टीकाकरण को अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लोगों को ढिलाई नही बरतनी चाहिए, नहीं तो यह खतरनाक हो सकती है।
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एंटिबॉडी के बावजूद हो सकता है संक्रमण
हाल ही में सिरो सर्वे आया था जिसमे कहागया था के देश में दो तिहाई आबादी में कोरोना की एंटीबॉडी मौजूद है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या दो तिहाई लोग कोरोना से सुरक्षित हैं इसपर डॉक्टर गुलेरिया का कहना है कि मुझे नहीं लगता है कि हम ऐसा कह सकते हैं। हमे पता है कि एंटिबॉडी समय के साथ खत्म हो जाएगी, दूसरी बात हमे यह नहीं पता है कि कितने लोगों में एंटिबॉडी आने के बाद लोग सुरक्षित हैं। पिछले साल कई ऐसे मामले सामने आए थे जिनके भीतर एंटिबॉडी थी बावजूद इसके वो संक्रमित हुए थे।
लोगों के गलत रवैये से साफ संकेत
कोरोना की तीसरी लहर के बारे में डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि बहुत अधिक संभावना है कि कोरोना की तीसरी लहर सितंबर या अक्टूबर में आ सकती है क्योंकि अगर हम चीजों को देखे कि वह किस तरह से हुई है तो इस बात के अधिक संकेत हैं। जैसे ही लोगों को प्रतिबंध से राहत मिली लोगों की भारी भीड़ पर्यटन स्थलों पर देखने को मिली, बड़ी संख्या में लोग ट्रैवल कर रहे हैं, लोग प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। हम चार लाख केस प्रतिदिन से 30 हजार केस प्रति दिन तक पहुंच गए हैं, लेकिन अगर आप पहले लहर पर नजर डालें तो उस वक्त भी नंबर बड़ी संख्या में कम हुए थे, लेकिन बाद में दूसरी लहर आई थी। । इस बात की संभावना है कि अगले कुछ हफ्तों के बाद या फिर सितंबर तक तीसरी लहर आ सकती है।
बच्चों पर पड़ेगा असर
क्या कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर अधिक असर डालेगी, इस सवाल पर डॉक्टर गुलेरिया का कहना है कि बच्चे वैक्सीन से सुरक्षित नहीं हैं, ऐसे में जो लोग वैक्सीन से सुरक्षित नहीं हैं उनपर कोरोना की तीसरी लहर असर डाल सकती है। जब संक्रमण के मामले बढ़ेंगे तो इसका असर उन लोगों पर सबसे अधिक होगा जो वैक्सिनेटेड नहीं हैं और बच्चे भी उसमे शामिल हैं। डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि हमने जो बच्चों की वैक्सीन के लिए ट्रायल किया उसमे तकरीबन 50 फीसदी बच्चों में पहले से ही एंटिबॉडी थी, बड़ी संख्या में बच्चे पहली और दूसरी लहर में हल्क संक्रमण का शिकार हुए और खुद ठीक हो गए। बहुत ही कम बच्चों को तेज बुखार या अन्य तरह की शिकायत हुई जिसकी वजह से उन्हें भर्ती कराना पड़े।












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