RT-PCR और एंटीजन टेस्ट को लेकर ICMR की नई एडवाइजरी, लैब्स पर बोझ होगा कम
नई दिल्ली, मई 3: देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने ऐसा कहर बरपाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में मरीजों को बेड और ऑक्सीजन तक ढंग से नहीं मिल पा रहे हैं। साथ ही सरकारी और प्राइवेट लैब्स पर टेस्टिंग का बोझ इतना ज्यादा बढ़ गया है कि रिपोर्ट आने में 5 से 7 दिन का वक्त लग जा रहा है, जिससे पॉजिटिव मरीजों की जान खतरे में पड़ रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने RT-PCR टेस्ट के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

ये है नई गाइडलाइन-
- ICMR के मुताबिक अगर कोई शख्स रैपिड एंटीजन टेस्ट या फिर RT-PCR में एक बार पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका टेस्ट दोहराया नहीं जाएगा।
- अगर स्वास्थ्य मंत्रालय की डिस्चार्ज पॉलिसी के तहत कोई मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा है, तो उसका कोरोना टेस्ट दोबारा नहीं होगा।
- लैब्स पर RT-PCR टेस्ट का लोड बढ़ गया है, ऐसे में अंतरराज्यीय यात्राओं के लिए निगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता खत्म की जाए।
- जिनके अंदर फ्लू या कोविड-19 के लक्षण हैं उन्हें गैर जरूरी यात्राओं से बचना चाहिए। इससे संक्रमण और ज्यादा फैल सकता है।
- बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों को यात्रा के दौरान कोविड गाइडलाइंस का पालन करना होगा।
- मोबाइल परीक्षण प्रयोगशालाएं अब GeM पोर्टल पर उपलब्ध हैं। ऐसे में राज्यों को इसे बढ़ाना चाहिए।
एंटीजन टेस्ट के क्या हैं फायदे?
ICMR के मुताबिक भारत सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जून 2020 में रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) शुरू किया था। इसकी खास बात ये है कि इसमें 15 से 20 मिनट के अंदर नतीजे आ जाते हैं। इसके बावजूद इसका इस्तेमाल कंटेनमेंट जोन और कुछ हेल्थ सेंटर पर ही हो रहा है। इसको बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
RAT के लिए ये गाइडलाइन
- RAT का इस्तेमाल सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होगा।
- RAT के लिए शहरों, गांवों और कस्बों में बूथ बनाए जाएं।
- अस्पतालों के अलावा आवासीय कॉलोनियों, स्कूलों, कॉलेजों आदि में भी एंटीजन टेस्ट के लिए बूथ बनाए जाएं।
- सभी बूथ को 24*7 आधार पर शुरू किया जाना चाहिए।
- कुछ विशेष सड़कों पर ड्राइव थ्रू (Drive-through) RAT सेवा शुरू की जाए।












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