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कोरोना के चलते बदलने वाला है केंद्र सरकार के कामकाज का तरीका, 15 दिन वर्क फ्रॉम होम पर विचार

नई दिल्ली- आने वाले दिनों में केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों को भी घर से काम करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि दफ्तर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके और उससे सरकार के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़े। अभी तक के प्रस्ताव के मुताबिक सरकार चाह रही है कि हर कर्मचारी के लिए यह व्यवस्था हो कि उसे साल में कम से कम 15 दिन वर्क फ्रॉम होम करना पड़े। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय ने इस संबंध में एक पूरा ड्राफ्ट बनाकर सभी मंत्रालयों को भेज दिया गया है और उनसे 21 मई तक अपनी राय देने को कहा गया है। यही नहीं सरकार अब आधिकारिक बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ही करने की सोच रही है, ताकि एक जगह ज्यादा लोगों की उपस्थिति की आवश्यकता ही न पड़े।

15 दिन वर्क फ्रॉम होम पर विचार

15 दिन वर्क फ्रॉम होम पर विचार

कोरोना वायरस की सच्चाई को स्वीकारते हुए केंद्र सरकार भी आने वाले दिनों में अपने कर्मचारियों के लिए भी वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रही है। कार्मिक मंत्रालय ने इसके लिए एक ड्राफ्ट तैयार करके सभी मंत्रालयों के पास भेजा है, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए साल में कम से कम 15 दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है। बुधवार को भेजे गए इस ड्राफ्ट में कहा गया है, 'इसकी संभावना बहुत ही अधिक है कि निकट भविष्य में केंद्रीय सचिवालय में उपस्थिति बहुत ही कम रहने वाली है और काम के स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए काम का समय भी बदलना पड़ सकता है। ' इसके अलावा ड्राफ्ट में आधिकारिक बैठकों के लिए एनआईसी प्लेटफॉर्म पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का भी प्रस्ताव रखा गया है। ड्राफ्ट कहता है, 'जो अधिकारी घर से काम करेंगे उन्हें फोन पर उपलब्ध रहना होगा। एनआईसी यह सुनिश्चित करेगा कि उनकी डिवाइस किसी भी मैलवेयर से प्रोटेक्टेड हो। '

वीपीएन के जरिए काम शुरू करने की योजना

वीपीएन के जरिए काम शुरू करने की योजना

इस हालात से निपटने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सभी मंत्रालयों और उससे जुड़े विभागों में ई-ऑफिस शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे कि वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था शुरू हो सके। मौजूदा स्थिति ये है कि 75 मंत्रालयों ने पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करना शुरू कर दिया है और 57 मंत्रालयों में तो 80 फीसदी काम ई-ऑफिस के जरिए ही हो रहे हैं। इसे और सुविधाजनक बनाने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सेक्शन ऑफिसर स्तर तक वीपीएन (virtual private network) की पहुंच देने का प्रस्ताव भेजा है, जिससे कि सुरक्षित नेटवर्क पर उसकी इलेक्ट्रोनिक फाइल तक पहुंच आसान बनाई जा सके। अभी तक यह सिर्फ डिप्टी सेकरेटरी और उच्चस्तरीय अधिकारियों को ही उपलब्ध है।

21 मई तक मांगा गया जवाब

21 मई तक मांगा गया जवाब

लेकिन, सरकारी काम की सुरक्षा और गोपनीयता को देखते हुए अभी भी कुछ सवाल बने हुए हैं। मसलन, गृहमंत्रालय की स्पष्ट गाइडलाइंस है कि क्लासिफाइड फाइलें इंटरनेट पर नहीं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इसलिए, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने कहा है कि वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था उनके लिए नहीं होगी, जो इस तरह के फाइलों को डील करेंगे। इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए डेस्कटॉप या लैपटॉप खरीदे जाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा इसमें संसदीय या वीआईपी सवालों के लिए एसएमएस अलर्ट सिस्टम रखने का भी प्रस्ताव है, ताकि जैसे ही फाइल की प्रोसेसिंग हो कमांड के अगले अधिकारी तक भी इसकी सूचना पहुंच जाए। सभी मंत्रालयों से कहा गया है कि वह 21 मई तक ड्राफ्ट पर अपना जवाब दे दें। इसके बाद कार्मिक मंत्रालय का प्रशासनिक सुधार विभाग और जन शिकायत वर्क फ्रॉम होम प्रोटोकॉल का फाइनल कर देगा।

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