नहीं मिला 'NO-कोरोना सर्टिफिकेट', इटली में फंसी भारतीय प्रोफेसर ने बयां किया दर्द
नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने चीन समेत दुनिया से करीब 100 देशों में आतंक मचा रखा है। इटली में कोरोना वायरस के कारण हो रही मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अभी तक इटली में कोरोना वायरस ने 827 लोगों की जान ले ली है जबकि इसके 12,400 केस सामने आए हैं। इटली में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं जिनके लिए वापस आना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उड़ान भरने से पहले उनको 'कोरोना वायरस नेगेटिव' का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया है।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, इटली में कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के कारण अस्पताल में भीड़ लगी हुई है। अस्पतालों की हालत ऐसी है कि वे कोरोना वायरस का टेस्ट करने तक से इनकार कर दे रहे हैं। 38 साल की भारतीय लेखिका और अशोका यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर जेनिस एरिका पारिएट भी इटली में फंसी हुई हैं। वह कहती हैं कि किसी चीज को लेकर जानकारी ही नहीं मिल पा रही है कि किससे बात की जाए। वह एक रिसर्च ट्रिप पर दो हफ्ते से रोम में हैं।
वह बुधवार को एलिटालिया एयरलाइंस की फ्लाइट से रोम एयरपोर्ट से भारत आने वाली थीं। कोरोना वायरस को लेकर हाई अलर्ट को देखते हुए उन्होंने अपना काम जल्द निपटाया और रोम एयरपोर्ट पर पहुंच गईं। लेकिन एयरपोर्ट पर, उनको उस वक्त झटका लगा जब पास से गुजर रहे एक शख्स ने उनसे पूछा कि वह कहां जा रही है? जेनिस ने जवाब दिया कि वह भारत वापस घर जा रही हैं। इसपर शख्स ने कहा कि क्या उनके पास 'कोरोना वायरस नेगेटिव' का सर्टिफिकेट है?
उस शख्स ने भारत सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का जिक्र किया। जेनिस को लगा था कि ये निर्देश केवल विदेशी यात्रियों के लिए है। उनका कहना है कि एंबेसी की वेबसाइट पर ऐसी कोई जानकारी नहीं थी कि भारतीय नागरिकों को भी सर्टिफिकेट लेना होगा। सर्टिफिकेट ना होने के कारण रोम एयरपोर्ट पर जेनिस के अलावा कई भारतीय छात्र फंसे हुए हैं जो वापस आने की राह देख रहे हैं।
भारत सरकार को जो सर्टिफिकेट चाहिए वो इटली द्वारा आसानी से जारी नहीं किए जा रहे हैं। इटली में कोरोना वायरस के इतने केस अस्पताल में आ रहे हैं कि खुद से एक टेस्ट करवाना संभव नहीं हो पा रहा है। जेनिस का कहना है कि वह इंडियन एंबेसी से मदद की उम्मीद कर रही हैं ताकि वह घर जा सकें। फिलहाल, वह इटली में फंसी हैं।












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