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Cornavirus Impact: 1000 से ज्‍यादा US कंपनियों से भारत सरकार ने किया संपर्क, चीन से निकल भारत में बिजनेस शुरू करने का प्रस्‍ताव

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नई दिल्‍ली। भारत ने कोरोना वायरस महामारी के चलते चीन से बाहर बिजनेस करने को बेकरार अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित करने की तैयारी कर ली है। मेडिकल डिवाइसेज बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एबॉट लैबोरेट्रीज से लेकर कई ऐसी कंपनियां हैं जिन्‍हें भारत में बिजनेस करने के लिए लुभाने की तैयारियां हो चुकी हैं। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप लगातार चीन को महामारी के लिए दोष देते आ रहे हैं और ऐसे में विषेशज्ञों की मानें तो भारत इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता है।

यह भी पढ़ें-भारत के FDI नियमों में बदलाव से डरीं चीनी कंपनियां, निवेशक घबराए!

कौन-कौन से उद्योगों को की गई पेशकश

कौन-कौन से उद्योगों को की गई पेशकश

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने अमेरिका में 1000 से ज्‍यादा कंपनियों से संपर्क किया है। इसके अलावा कई उच्‍चायोगों के जरिए भी संपर्क बनाया गया है। ऐसी कंपनियां जो चीन से बाहर मैन्‍यूफैक्‍चरिंग लेकर जाने पर विचार कर रही हैं, उन्‍हें कई तरह के पैकेज की पेशकश भी भारत की तरफ की गई है। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत की प्राथमिकता मेडिकल उपकरण सप्‍लाई करने वाली कंपनियां हैं। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, टेक्‍सटाइल्‍स, चमड़ा और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली ऐसी कंपनियों से संपर्क किया गया है जो 550 से ज्‍यादा उत्‍पादों को तैयारी करती हैं। ट्रंप लगातार चीन को कोविड-19 के लिए दोष दे रहे हैं।

महामारी के बाद चीन के साथ रिश्‍ते बिगड़ने की आशंका

महामारी के बाद चीन के साथ रिश्‍ते बिगड़ने की आशंका

माना जा रहा है कि महामारी के बाद चीन के संबंध दुनिया की कंपनियों के साथ और खराब हो सकते हैं और सरकारें चीन के बाहर जाने के विक‍ल्‍पों पर सोच सकती हैं। जापान ने पहले ही अपने चीन से बाहर निकलने के लिए अपनी कंपनियों के लिए 2.2 बिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान कर दिया है। वहीं यूरोपियन यूनियन के सदस्‍य देशों ने भी चीनी सप्‍लायर्स पर निर्भरता कम करने की योजना बना ली है। भारत उन अमेरिकी कंपनियों को तरजीह दे रहा है जो हेल्‍थकेयर उत्‍पाद और डिवाइसेज बनाती हैं।

भारत की तरफ से दिया गया भरोसा

भारत की तरफ से दिया गया भरोसा

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मेडट्रॉनिक पीएलसी और एबॉट लैबोरेट्रीज के साथ बातचीत भी शुरू हो गई है। हालांकि दोनों ही कंपनियों की भारत में मौजूदगी है और ऐसे में अगर वह चीन से बाहर अपना बिजनसे शुरू करना चाहती हैं तो उन्‍हें आसानी रहेगी। कंपनियों के मुंबई में फाइनेंशियल सेंटर्स है और ये दोनों कंपनियां भारत के अस्‍पतालों के साथ पहले से ही काम कर रही हैं। अधिकारियों की तरफ से इन दोनों कंपनियों को बताया गया है कि जमीन अधिग्रहण और दूसरे मसलों में भारत, अमेरिका और जापान की तुलना में कहीं ज्‍यादा बेहतर है।

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने किया था इशारा

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने किया था इशारा

अधिकारियों की तरफ से यह भरोसा भी दिया गया है कि अगर कंपनियां भारत आती हैं तो यहां के श्रमिक कानूनों में भी बदलाव किया जा सकता है। हालांकि वाणिज्‍य मंत्रालय की तरफ से इस पर कोई भी टिप्‍पणी नहीं की गई है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की तरफ से अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर एक बड़ी बात कही गई थी। केंद्रीय लघु उद्योग और राजमार्ग एंव परिवहन मंत्री गडकरी ने कहा था कि भारत को कोरोना वायरस अर्थव्‍यवस्‍था की वजह से चीन के खिलाफ बढ़ती दुनिया की नफरत को एक आर्थिक मौके के तौर पर देखना चाहिए। उन्‍होंने कहा था कि भारत सरकार विदेशी निवेशकों को क्‍लीयरेंस और सभी जरूरी चीजें दगीी और विदेश निवेश को आकर्षित करेगी।

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English summary
Coronavirus Impact: India to attract more than 1000 US companies out of China.
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