मदद के लिए सोनू सूद ने खोल दिया अपना होटल, बोले- एसी में बैठकर ट्वीट करने से नहींं होगा मजदूरों का भला

मुंबई। 'जाकर सभी प्रवासी श्रमिकों को कह दो कि वो चिंता न करें क्योंकि उनके लिए सोनू सूद है ...' पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर ऐसी बहुत सी खबरें वायरल हो रही हैं जिसमें सोनू सूद द्वारा किए अच्छे काम की बात हो रही है। सोनू सूद ने सबसे पहले मुंबई के जुहू स्थित होटल के दरवाजे मेडिकल वर्कर्स के लिए खोले थे। उन्हें जब पता चला था कि कुछ मेडिकल वर्कर्स को उनकी बिल्डिंग में जाने नहीं दिया जा रहा था और उनके साथ बुरा व्यवहार हो रहा था तो उन्होंने अपने होटल को इन मेडिकल वर्कर्स के इस्तेमाल के लिए दे दिया था। सोनू ने कहा था कि अस्पतालों में काम करने के बाद मेडिकल वर्कर्स उनके होटल शक्ति सागर में आराम करने और सोने आ सकते हैं।

AC में बैठकर ट्वीट करने से कुछ नहीं होगा

AC में बैठकर ट्वीट करने से कुछ नहीं होगा

न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में सोनू सूद ने कहा "मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है कि हम प्रवासियों, हमारे देश के दिल की धड़कन की मदद करें। हमने प्रवासियों को अपने परिवारों और बच्चों के साथ राजमार्गों पर चलते देखा है। हम सिर्फ एसी में बैठकर ट्वीट नहीं कर सकते और अपनी चिंता तब तक दिखा सकते हैं जब तक हम डॉन नहीं बन जाते। सड़कों पर हम तब तक नहीं जाते, जब तक कि हम उनमें से एक नहीं बन जाते।

इसमें इतनी संतुष्टि मिल रही है बंया नहीं कर सकता

इसमें इतनी संतुष्टि मिल रही है बंया नहीं कर सकता

सोनू सूद ने दावा किया "अब मुझे बहुत सारे संदेश और सैकड़ों ईमेल रोज़ मिलते हैं जो कहते हैं कि वे यात्रा करना चाहते हैं और मैं सुबह से शाम तक नॉन-स्टॉप उनसे समन्वय कर रहा हूं। यह इस लॉकडाउन के दौरान मेरा एकमात्र काम बन गया है। इतनी संतुष्टि कि मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। " उन्होंने आगे कहा "जब मैं इन प्रवासियों और उन सभी पीड़ित लोगों को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि हमने इंसान होने का हक खो दिया है। मैं रात को ठीक से सो नहीं पा रहा क्योंकि मेरे दिमाग में यही चलता रहता हैं। मैं सबके ईमेल पढ़ रहा हूं, उनके फोन नंबरों को नोट कर रहा हूं, उन्हें कॉल करने की कोशिश कर रहा हूं। ऐसे सैकड़ों लोग हैं। मैं चाहता हूं कि मैं खुद ही गाड़ी चलाकर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचा कर उन्हें उनके परिवारों के साथ फिर से मिलाऊं।"

हम उन्‍हें सड़कों पर मरने के लिए नहीं छोड़ सकते

सोनू सूद ने कहा "वे लोग ही भारत का असली चेहरा हैं, उन्होंने हमारे घरों को बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने अपने घरों, अपने माता-पिता, अपने प्रियजनों को छोड़ दिया है और सिर्फ हमारे लिए इतनी मेहनत की है। आज अगर हम उनका समर्थन करने के लिए आगे नहीं आते हैं, तो मुझे लगता है हमें हमने खुद को इंसान कहने का अधिकार खो दिया है। हमें अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे आ कर उनकी मदद करने की जरूरत है। हम उन्हें सड़कों पर नहीं छोड़ सकते, हम उन्हें मार्गों पर मरते हुए नहीं देख सकते, हम उन्हें छोटे बच्चों को उनके साथ चलने के लिए नही छोड़ सकते है।"

हमारे समाज में प्रवासी श्रमिक सिर्फ संख्या हैं, कोई नाम नहीं, ये दुखद है

सोनू सूद ने कहा 'मुझे इस बात का बहुत दुख है कि हम सिर्फ इतना कहते हैं कि आठ प्रवासियों की मृत्यु हो गई या 10 प्रवासियों की मृत्यु हो गई या 16 प्रवासी एक ट्रेन के नीचे आ गए। हम उनका नाम अखबारों या सोशल मीडिया में क्यों नहीं डाल सकते? हमें प्रवासियों पर विचार करना होगा। हमें यह जानने की आवश्यकता है कि ये लोग कौन हैं, जिन्होंने अपना जीवन खो दिया। हमें उनके नाम जानना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए"। जरूरतमंदों की मदद करने के लिए लोग उनकी प्रशंसा कर रहे है इसके के बारे में कैसा महसूस होता है, पूछने पर सोनू ने बताया "लोग दुनिया भर से लोग आशीर्वाद की बारिश कर रहे हैं। यह सुखद है और यह मुझे कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। मैं उनके लिए खड़ा हूं, मैं सड़कों पर रहूंगा, मैं उनके साथ रहने और उनकी मदद करने के लिए दिन-रात कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।" अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के अनुसार मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि हर प्रवासी अपने गंतव्य तक पहुँचता है।"

रमजान में रोज 25 हजार लोगों को खाना खिला रहे हैं सोनू

रमजान के पवित्र महीने के शुरू होने के चलते उन्होंने ऐलान किया कि वे इस पाक महीने में रोज 25 हजार लोगों को खाना खिलाएंगे। सोनू ने कहा था कि हम इन लोगों के लिए स्पेशल मील किट्स की सप्लाई करेंगे ताकि पूरे दिन रोजा रखने के बाद जब उन्हें खाने की जरूरत महसूस हो तो उन्हें भूखे पेट ना सोना पड़े। इस पहल के सहारे बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों से आए माइग्रेंटस को मदद मिलेगी। लॉकडाउन के चलते जब कई मजदूर अपने घरों के लिए पैदल ही चलने लगे तो सोनू एक बार फिर इन गरीब और वंचित लोगों की मदद के लिए आगे आए और उन्होंने इनमें से कई लोगों को बसें उपलब्ध कराईं ताकि ये लोग सकुशल अपने घरों तक पहुंच सके। सोनू की इस पहल की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं।

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