भविष्‍य में नहीं होगी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा की कमी? स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने दिया ये जवाब

नई दिल्‍ली। देश में लॉकडाउन का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है। इसके बावजूद कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में कमी होने के बजाय लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। कोरोना वायरस को लेकर डेली रिपोर्ट देने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य और गृह मंत्रालय की संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते 24 घंटे में 773 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं, जो अब तक के सर्वाधिक हैं। लव अग्रवाल ने कहा कि हम COVID19 को देशव्यापी लेवल पर मॉनीटर करना चाहते हैं। उसके तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने COVID19 मैनेजमेंट के लिए एक ट्रेनिंग मॉड्यूल लॉन्च किया है जिसका नाम है इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग पोर्टल।

24 घंटे में कोरोना वायरस ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 773 नए पॉजिटिव केस आए सामने

उन्‍होंने कहा कि अस्पतालों में ध्यान दिया जा रहा है कि संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों का पालन किया जाए, ताकि स्वास्थ्य कार्यकर्ता COVID-19 से संक्रमित न हों। ICMR के रतन गंगाखेडकर ने कहा कि देश में कोरोना वायरस के कुल 121271 टेस्‍ट किए गए हैं। लव अग्रवाल ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाता है कि न केवल आज और भविष्य में एचसीक्यू (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन) और आवश्यकता पड़ने पर कोई कमी नहीं हो।

लव अग्रवाल ने यह भी बताया कि कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार ने खासतौर से तीन तरह के सेंटर बनाए हैं। पहली कैटेगरी में कोविड केयर सेंटर हैं जो माइल्‍ड और संदिग्‍ध मामलों के लिए हैं। इनमें स्‍कूल, कॉलेज और होटल शामिल हैं जिन्‍हें क्‍वारंटीन सुविधा के लिए तब्‍दील किया गया है। दूसरी कैटेगरी में डेडिकेटेड कोविड हेल्‍थ सेंटर हैं। ये उनके लिए हैं जिनमें मॉडरेट सिम्‍पटम देखे जाते हैं। इसके लिए अस्‍पतालों में अलग ब्‍लॉक बनाए गए हैं जिनमें एंट्री/एग्जिट अलग होती है।

सुनिश्चित किया गया है कि हर बेड पर ऑक्‍सीजन सपोर्ट सिस्‍टम हो। तीसरी कैटेगरी में डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल्‍स रखे गए हैं। यह गंभीर मामलों और उम्रदराज लोगों के लिए हैं। इनमें एंट्री/एग्जिट के अलग बंदोबस्‍त हैं। सुनिश्चित किया गया है कि हर बेड पर वेंटिलेटर के साथ ऑक्‍सीजन सपोर्ट सिस्‍टम और आईसीयू फेसिलिटी हो।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की भविष्य में भी कोई कमी नहीं

भारत समेत दुनियाभर में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन नाम की दवा की मांग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। भारत इसका सबसे बड़ा निर्माता है और अमेरिका भी हमसे यह दवा मांग चुका है। संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने सुनिश्चित किया कि न सिर्फ अभी बल्कि भविष्य में इस दवा की कोई कमी नहीं आने वाली है।

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