COVID-19: जानिए मुंबई में आखिर इतने लोगों की क्यों हो रही कोरोना वायरस से मौत?
On Tuesday, 11 people died of infection of the Korana virus in just one day in Mumbai. People are dying from corona due to lack of adequate health facilities in Mumbai. Know the truth,कोरोना: मुंबई में आखिर इतने लोगों की क्यों हो रही कोरोना से मौतें?
मुंबई। कोरोना वायरस कोविड 19 का प्रकोप महाराष्ट्र में बहुत तेजी से फैला रहा है वहांअब तक2,687 लोग पॉजिटिव पाए गए और 178 लोगों की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र में कोरोना ने सबसे अधिक त्राहिमान प्रदेश की राजधानी मुंबई में मचा रखा है। मंगलवार को मात्र एक दिन में मुंबई में 11 कोरोना से संक्रमित लोगों की मौत हो गई वहीं कोरोना वायरस के 204 नए मामले सामने आए। मुंबई में हर दिन इस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामले से हड़कंप मचा हुआ है। हर दिन सैकड़ों नए मामले सामने आने के साथ-साथ मौत के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे हैं। जानिए आखिर ऐसा क्या कारण हैं कि मुंबई में कोरोना का कहर बढ़ रहा है और आखिर इतने लोगों की क्यों हो कोरोना से मौतें हो रही हैं ?

कोरोना के इलाज के नहीं हैं पर्याप्त सुविधाएं
बता दें कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के कारण मुंबई में हेल्थ सेक्टर नाकाफी साबित हो रहा है। मुंबई में एक के बाद एक अस्पताल कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। यहां सुविधाएं न होने के कारण कई दिन मरीजों की भर्ती रोक दी गई है।
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15 बड़े अस्पतालों के हेल्थ वर्कर वायरस की चपेट में
आर्थिक राजधानी मुंबई में 1753 लोगों के संक्रमित केस और अब तक और 111 की मौतें ये गवाही दे रही हैं कि यहां का कोरोना की खिलाफ जंग लड़ने के लिए यहां के हेल्थ सेक्टर की कोई तैयारी नहीं है। मुंबई के 15 बड़े अस्पतालों के हेल्थ वर्कर वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जसलोक, ब्रीचकैंडी, खार-हिंदुजा, भाटिया, वॉकहार्ट और सैफी में डॉक्टरों और नर्सों में कोविड-19 संक्रमण पाया गया। भारत की किसी दूसरे शहर के अस्पतालों का इतना बुरा हाल नहीं हुआ होगा। कुल मिलाकर यहां का हेल्थ सेक्टर कोरोना के आगे धाराशायी हो चुका है।

इस अस्पताल में हाइजीन मेनटेन करना बनी बड़ी चुनौती
मुंबई के सेवनहिल्स अस्पताल में गंभीर मरीजों को रिफर करने से पहले कई हफ्तों तक कस्तूरबा अस्पताल खुद ही संघर्ष करता रहा। सेवनहिल्स मुंबई में कोविड 19 के पेसेन्ट का इलाज करने वाला बड़ा हास्पिटल हैं। लेकिन इस अस्पताल में भी कई समस्याएं हैं। यहां अभी 8 बेड वाला आईसीयू ही है जिनके बढ़ाकर 30 किया जाना है। इसके अलावा अस्पताल हाउसकीपिंग स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है, जिससे कारण यहां की साफ-सफाई के चलते यहां हाइजीन भी बड़ी चुनौती बन गई है। कोरोना संक्रमितों के आइसोलेशन वार्ड में हाईजीन सबसे महत्वपूर्ण होती हैं।

आईसीयू की कमी से जूझ रहे अस्पताल
मुबंई के बड़े अस्पतालों के घुटने टेकने के बाद यहां कस्तूरबा अस्पताल अकेले कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार यहां एक भी आईसीयू नहीं है और न ही गंभीर मरीजों को देखने वाले फुल-टाइम सीनियर इंटेसिविस्ट। अब यह किसी से छिपा नहीं है कि कोरोना उन मरीजों के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी, डायबिटीज या सांस से जुड़ी दिक्कतें है।

मरीजों को क्रिटिकल केयर न मिल पाने से हो रही मौत
मुंबई में कोविड-19 से बढ़ती मौत के आंकड़ों को नियंत्रित करने के लिए नियुक्त की गई टास्क फोर्स के अनुसार मुंबई में कोरोना अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधा में अति शीघ्र ही सुधार की जरूरत है। मंगलवार को जिन 11 की मौत हुई, उनमें से सात 50 से 65 की उम्र के थे जिन्हें हाइपरटेंशन, डायबिटीज जैसी बीमारी थी। इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि इन सातों में दो दिन पहले ही कोरोना की पुष्टि हुई थी। इससे साफ हैं कि कोरोना के गंभीर मरीजों को क्रिटिकल केयर न मिल पाने की वजह से मुंबई में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।

मुंबई को 500 आईसीयू बेड की जरूरत
इनफेक्शन डिजीस के विशेषज्ञ डाक्टर ने कहा कि कोरोना के केस बढ़ने के बाद जिस तरह से बीएमसी के फैसले लिए, उससे साफ झलकता है कि उनके पास कोई तैयारी ही नहीं थी। डॉक्टर ने बताया कि जब 11 मार्च को मुंबई में पहला केस आया था, उसके एक महीने बाद तक पूरी तरह से आईसीयू सुविधा वाले कोविड-19 अस्पताल नहीं तैयार किया जा सका। इस वक्त मुंबई को 500 से अधिक आईसीयू बेड की जरूरत है। बड़े निजी अस्पताल को आगे आना चाहिए।

अपर नगर आयुक्त ने कही ये बात
वहीं अपर नगर आयुक्त सुरेश काकनी ने मीडिया को बताया कि आईसीयू बेड चरणबद्ध तरीके से जोड़े जा रहे हैं। 'हमारे कोविड-19 सेंटर में 51 वेंटिलेटर हैं जिनमें से 11 कस्तूरबा में हैं।' उन्होंने कहा कि कस्तूरबा में फुल टाइम इंटेसिविस्ट की कमी के चलते केईएम, नायर और सायन अस्पताल के डॉक्टर मदद कर रहे हैं और 'हम आईसीयू बेड की क्षमता को बढ़ा रहे हैं और प्राइवेट एक्सपर्ट से भी क्रिटिकल केयर मरीजों के इलाज करने के लिए कह रहे हैं।

ज्यादा टेस्टिंग हो रही इसलिए पता चल रहे ज्यादा केस
मुंबई में बढ़ते कोरोना मरीजों के आंकड़ों की एक वजह अधिक टेस्टिंग भी बताई जा रही है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अधिक से अधिक टेस्टिंग की जरूरत क्यों है, इसका अंदाजा मुंबई के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 12 दिन में कोरोना टेस्टिंग 3 गुना बढ़ाई गई, जिसके कारण नए मरीजों की संख्या में 5 गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है। संक्रमण रोग विशेषज्ञ डाक्टर के अनुसार जितने अधिक केस आएंगे, जांच उतनी बढ़ानी होगी। वहीं एक डाक्टर के अनुसार वर्तमान स्थिति के अनुसार, मुंबई को रोजना 15 हजार टेस्टिंग की जरूरत है। वहीं, बीएमसी के अधिकारी के अनुसार हाई रिस्क मरीजों को न केवल अधिक से अधिक ढूंढ रही है, बल्कि उनकी जांच भी कर रही है। यही कारण है कि मामले बढ़ रहे हैं।'
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