कोरोना, निपाह और अब मंकीपॉक्स: सबसे पहले केरल में ही क्यों मिलते हैं वायरस ? 3 कारण जानिए
नई दिल्ली, 26 जुलाई: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज वायरल होते देखा गया है कि सभी संक्रामक बीमारियां आखिर केरल से ही क्यों शुरू होती है। सवाल बेवजह नहीं है। यह तथ्य है कि कई बीमारियों में सबसे पहले संक्रमण का पता केरल में ही चला है। हम कोविड में ऐसा देख चुके हैं। निपाह वायरस के मामले में भी ऐसा ही हुआ था और अब मंकीपॉक्स के पहले मामलों की पुष्टि भी केरल में ही की गई है। इससे पहले भी तमाम बीमारियों का विस्फोट केरल से ही हुआ था। आइए जानते हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी कौन सी तीन प्रमुख वजह बता रहे हैं ?

सबसे पहले केरल में ही क्यों मिलते हैं वायरस ?
कोविड-19, निपाह और मंकीपॉक्स सभी वायरल संक्रमण से होने वाली बीमारियां हैं। लेकिन, भारत के संबंध में इनमें एक और चीज सामान्य है। देश में इन तीनों बीमारियों का प्रकोप सबसे पहले केरल में ही शुरू हुआ। मंकीपॉक्स के पहले तीन मामले भी केरल में ही मिले हैं। इतना ही नहीं, चाहे चिकनगुनिया हो, जापानी इंसेफेलाइटिस हो, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम हो, वेस्ट नाइल इंसेफेलाइटिस हो या फिर डेंगू और वायरल हेपेटाइटिस, इन सभी के संक्रमण के बारे में सबसे पहले रिपोर्ट करने वाला यही दक्षिण भारतीय राज्य है।

मंकीपॉक्स की पहले तीनों मामले केरल में मिले
मंकीपॉक्स के पहले चार मामलों में तीन केरल में ही सबसे पहले पाए गए हैं। पहला कोल्लम जिले से और उसके बाद कन्नूर और मलाप्पुरम जिलों से। चौथा मामला राजधानी दिल्ली में पाया गया। सोमवार को विदेश से लौटे तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के एक मरीज में भी इस बीमारी के लक्षण दिखने के बाद उसे हैदराबाद के सरकारी फीवर हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड में एडमिट कराया गया है।

बेहतर सर्विलांस सिस्टम एक कारण हो सकता है-एक्सपर्ट
सवाल है कि ऐसा क्या है कि इस तरह की संक्रामक बीमारियों की रिपोर्टिंग सबसे पहले केरल से ही क्यों होती है? एक्सपर्ट का कहना है कि स्वास्थ्य का बेहतर सर्विलांस सिस्टम इसका पहला कारण हो सकता है। सीएनबीसी से बातचीत करते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पूर्व सदस्य डॉक्टर एपी सुगुनम ने इसके लिए या तो वायरस के प्रकोप बढ़ने या फिर ज्यादा संवेदनशील सर्विलांस सिस्टम को कारण बताया है।

नागरिकों का रोल- एक्सपर्ट
इस मुद्दे पर महामारी विज्ञानी और पब्लिक पॉलिसी एंड हेल्थ सिस्टम के एक्सपर्ट डॉक्टर चंद्रकांत लहरिया का मानना है कि यह नागरिकों की भागीदारी या जागरूकता पर निर्भर करता है। उनके मुताबिक कोल्लम के पहले मामले में शख्स ने खुद ही जाकर जांच करवाई थी। जबकि, उसमें लक्षण भी नहीं आए थे। क्योंकि, वह यूएई से लौटा था और विदेश में उसका संपर्क पॉजिटिव पाया गया था।

विदेश से आने वालों की ज्यादा संख्या- एक्सपर्ट
जानकारों का मानना है कि इसका एक कारण यह भी है कि केरल में प्रवासियों की आबादी काफी ज्यादा है। इस राय के समर्थन में एक्सपर्ट कहते हैं कि केरल के बाद महाराष्ट्र और दिल्ली में भी ऐसे मामलों का पहले पता चलता है, क्योंकि यहां भी विदेशों से ज्यादा लोग आते हैं। केरल में 14 जुलाई को कोल्लम में जो पहला केस मिला, वह संयुक्त अरब अमीरात से तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा था। 18 जुलाई को कन्नूर वाला दूसरा मामला भी यूएई से लौटने से संबंधित है। तीसरा मालाप्पुरम जिले वाले मामले का संबंध भी यूएई से जुड़ा है, जो 6 जुलाई को कन्नूर पहुंचा था। उसे 13 जुलाई को बुखार हुआ और दो दिन बाद चकत्ते निकल आए, जिसके बाद उसे आइसोलेशन में डाला गया।












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