कोरोना संकट: अब धार्मिक संस्थान खजाने में जमा अकूत दौलत दान करें, बुजुर्ग भाजपा नेता की अपील

नई दिल्ली- कोरोना से जारी जंग के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने देश के तमाम धार्मिक संस्थाओं से अपील की है कि संकट की इस घड़ी में वो अपना खजाना राष्ट्रहित में खोल दें। यादव ने गीता और भगवान कृष्ण का हवाला देते हुए कहा है कि अगर इन धार्मिक संस्थानों में जमा धन इस संकट के वक्त में देश के काम नहीं आएंगे तब कब आएंगे। गौरतलब है कि कुछ धार्मिक संस्थान इस आपातकाल में मदद के लिए आगे आए भी हैं। लेकिन, हुकुमदेव को शायद लग रहा है कि इन संस्थानों का प्रयास पूरा नहीं है और उन्हें अपना दिल खोल देना चाहिए। क्योंकि, इनके खजानों जो दौलत जमा हैं, आखिर उसे देश के नागरिकों ने ही भरा है। इसीलिए अगर आज देश के नागरिकों को उसकी आवश्यकता है तो उन्हें आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए।

संकट के समय दान दें धार्मिक संस्थान- हुकुमदेव

संकट के समय दान दें धार्मिक संस्थान- हुकुमदेव

बुजुर्ग भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव ने देश को कोरोना संकट से उबारने के लिए धार्मिक संस्थानों से आगे आने की अपील की है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा है कि इन धार्मिक संस्थाओं के पास भारत सरकार के एक साल के बजट से भी ज्यादा पैसे हैं, वो उन्हें देश के नागरिकों पर आए संकट से उबारने में खर्च करने चाहिए। हुकुमदेव ने कहा है कि कोरोना ने दुनिया भर के देशों को उलझा दिया है। अभी कोई देश इस स्थिति में नहीं हैं कि वो दूसरों की मदद कर सकें। उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में भारत के नागरिकों को आत्मचिंतन करना चाहिए। उनकी ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, 'सांसद, विधायक, सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति तथा सभी पेंशनभोगी त्याग नहीं कर सकते हैं.....' हालांकि, बाद की पंक्तियों से लगता है कि उन्होंने तंज में ये बातें कही हैं। इसके बाद कहा गया है, 'इसीलिए धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के पास जो संपत्ति है, उन्हें आम जनता के लिए दान में देना चाहिए। आखिर ये संपत्ति भी नागरिकों ने ही दान देकर जमा किए हैं।'

राष्ट्रधर्म क्या कह रहा है ?

राष्ट्रधर्म क्या कह रहा है ?

बुजुर्ग भाजपा नेता की ओर से जारी प्रेस रिलीज में ऐसे धार्मिक संगठनों से कहा गया है, 'देश के धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के पास संपत्ति है, धार्मिक स्थानों के खजाने में इतना पैसा है कि भारत सरकार के सालाना बजट से भी ज्यादा है। इन धार्मिक स्थानों में जमा दौलत किस काम के लिए है। इस समय राष्ट्र भयंकर संकट में है। राष्ट्र के नागरिक बचेंगे तभी कुछ भी बचेंगे। ईश्वर की इच्छा और प्रेरणा से राष्ट्र के नागरिकों ने धार्मिक संस्थानों में दान देकर धन को संचित कोष में जमा किया था।......गीता में भी भगवान कृष्ण ने निर्देश दिया था.....अभी वह समय आ गया है। हम अपनी संतानों और भावी पीढ़ियों के लिए त्याग नहीं कर सकते हैं ? राष्ट्रधर्म क्या कह रहा है ? स्वयं लोग घोषणा करें और प्रधानमंत्री राहत कोष में स्वेच्छा से दान करें। ' यादव ने खुद अपने एक महीने का पेंशन देने की घोषणा की है।

शिरडी साईं ट्रस्ट ने 51 करोड़ दिए हैं

शिरडी साईं ट्रस्ट ने 51 करोड़ दिए हैं

वैसे कुछ धार्मिक संगठन संकट की इस घड़ी में देश की सहायता के लिए आगे भी आए हैं। मसलन, शिरडी साईं ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री रिलीफ फंड में 51 करोड़ रुपये का दान दिया है। वहीं मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर ने कोरोना से जंग लड़ रहे लोगों की खाने-पीने के इंतजाम कराए हैं। यही नहीं देश के उद्योगपति, मंत्री, सांसद, विधायक भी एक के बाद एक अपनी ओर से दान का ऐलान कर रहे हैं। सीआरपीएफ कर्मियों ने अपनी एक दिन की सैलरी ही दान में देने की घोषणा की है। इसी तरह बॉलीवुड से लेकर साउथ के फिल्मों के स्टारों ने भी अपने-अपने स्तर पर दान की घोषणा की है। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी ने राहत कोष में दान दिया है।

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