कोरोना वायरस का लैम्ब्डा वेरिएंट कितना खतरनाक? 25 देशों में मिले इस वेरिएंट के बारे में जानिए सब कुछ

नई दिल्ली, 9 जुलाई। पूरे देश में कोरोना वायरस की कहर बरपाने वाली दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट के बाद एक नए वेरिएंट लैम्ब्डा की एंट्री हो चुकी है। लैम्ब्डा वेरिएंट जिसे वैज्ञानिकों ने सी.37 भी नाम दिया है, अब नया उभरता हुआ खतरा है जिसे अब तक 25 से अधिक देशों में पाया जा चुका है।

लैम्ब्डा वेरिएंट के बारे में जो मालूम है

लैम्ब्डा वेरिएंट के बारे में जो मालूम है

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में कोरोना वायरस के सी.37 म्यूटेंट को एक नया वेरिएंट घोषित किया है। लैम्ब्डा के नाम से पहचाने जाने वाले इस वेरिएंट पहली बार 14 जून को पहचाना गया था। यह पहली बार पेरू में देखा गया था, जो जल्द ही दक्षिण अमेरिका के देशों में फैल गया और वहां एक प्रमुख स्ट्रेन बन गया था।

हाल ही में लैम्ब्डा वेरिएंट को ब्रिटेन और कुछ यूरोपीय देशों के कुछ हिस्सों में भी पता चला है, जो पहले ही डेल्टा वेरिएंट को कहर से लड़ रहा है।

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    क्या यह चिंताजनक वेरिएंट है?

    क्या यह चिंताजनक वेरिएंट है?

    विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लैम्ब्डा वेरिएंट की उच्च संक्रामकता और संचरण क्षमता के बारे में सावधान रहने को कहा है। हालाँकि इसे अभी तक वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न घोषित नहीं किया गया है। वर्तमान में यह सांतवां वेरिएंट है जिसे वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट में शामिल किया गया है। वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट का मतलब है कि यह म्यूटेंट आगे संचरण क्षमता और वायरल प्रसार को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों को प्रभावित कर सकते हैं।

    आखिर क्यों है चिंता करने की वजह
    लैम्ब्डा संस्करण हालांकि अभी तक चिंताजनक वेरिएंट नहीं है लेकिन इसे संभावित खतरे के रूप में माना जा रहा है क्योंकि इसमें उच्च संचरण क्षमता और उत्परिवर्तन विशेषताएं हैं। वर्तमान में हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि लैम्ब्डा वेरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में कम से कम 7 म्यूटेशन होते हैं जो इसे घातक बनाते हैं और संचरण को बढ़ाते हैं। भारत में घातक बनकर आए डेल्टा वेरिएंट में तीन उत्परिवर्तन हैं।

    क्या वैक्सीन से बच निकलने में सक्षम?

    क्या वैक्सीन से बच निकलने में सक्षम?

    अभी इस वेरिएंट पर जीनोमिक परीक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान जारी है फिर भी यह संदेह किया जा रहा है कि लैम्ब्डा वेरिएंट होने वाला भारी म्यूटेशन संक्रमण को तेजी से फैलने में मदद करता है और संभवतः यह टीके से पैदा एंटीबॉडी और यहां तक ​​कि खुद से तैयार होने वाली इम्यूनिटी से भी बचने की अनुमति दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर से संक्रमण में उसी तरह से वृद्धि हो सकती है जैसी दूसरी लहर के दौरान देखी गई थी। लेकिन इस पर बहुत कम साक्ष्य उपलब्ध हैं इसलिए किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए अधिक गहराई से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

    वेरिएंट के लक्षण
    पेरू लैम्ब्डा वेरिएंट के फैलाव का केंद्र बना हुआ है। देश में पिछले साल के मुकाबले इस बार मृत्यु दर में वृद्धि देखी गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस वृद्धि के पीछे वेरिएंट जिम्मेदार है या नहीं।

    बावजूद इसके विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को आम तौर पर वेरिएंट के संभावित लक्षणों के बारे में सतर्क रहना चाहिए। इसके लक्षणों में लगातार तेज खांसी, तेज बुखार, स्वाद व गंध में बदलाव, सांस फूलना और शरीर में दर्द शामिल हैं।

    भारत में कितनी चिंता करने की जरूरत

    भारत में कितनी चिंता करने की जरूरत

    अभी तक भारत या इसके पड़ोसी देशों में लैम्ब्डा वेरिएंट का आधिकारिक रूप से कोई भी केस नहीं पाया गया है। चूंकि यह एक संभावित उभरता हुआ खतरा है इसलिए इसके खतरों को कम नहीं आंका जाना चाहिए। खासतौर पर जब भारत खतरनाक दूसरी लहर से अभी उबर रहा है तो जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है। इससे बचने के लिए अभी टीकाकरण और कोविड उपयुक्त व्यवहार से सबसे प्रमुख तरीका है जिनका पालन किया जाना चाहिए।

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